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आज है विजया एकादशी 2026, इस व्रत से मिलती है सफलता और शत्रुओं पर विजय, जानें पूरी पूजा विधि

Written by:Bhawna Choubey
Published:
फाल्गुन कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी पर व्रत और पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, शत्रुओं पर विजय मिलती है और घर में सुख-समृद्धि आती है। जानें सही पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व।
आज है विजया एकादशी 2026, इस व्रत से मिलती है सफलता और शत्रुओं पर विजय, जानें पूरी पूजा विधि

फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष एकादशी को आने वाली विजया एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान की पूजा करते हैं और जीवन की परेशानियों से मुक्ति की कामना करते हैं। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं और सफलता के नए रास्ते खुलते हैं।

घर-परिवार में सुख, व्यापार में तरक्की और शत्रुओं पर विजय पाने के लिए लोग पूरे श्रद्धा भाव से यह व्रत रखते हैं। इस दिन भगवान की पूजा करने से मन को शांति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।

विजया एकादशी व्रत का शुभ मुहूर्त और पारण का समय

पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी, शुक्रवार को रखा जाएगा। यह तिथि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में आती है और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। व्रत का पारण यानी व्रत खोलने का समय अगले दिन 14 फरवरी, शनिवार को सुबह 6:35 बजे से 8:52 बजे के बीच बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पारण सही समय पर करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

विजया एकादशी का धार्मिक महत्व

सनातन परंपरा में एकादशी का व्रत भगवान की कृपा प्राप्त करने का सरल और प्रभावी माध्यम माना गया है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। मान्यता है कि विजया एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। नौकरी, व्यापार, पढ़ाई या पारिवारिक जीवन हर क्षेत्र में सफलता मिलती है। कई लोग इसे नकारात्मक शक्तियों से बचाने वाला व्रत भी मानते हैं। धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि इस दिन किया गया व्रत और दान बड़े यज्ञ के बराबर पुण्य देता है। इसलिए इस तिथि को अत्यंत पवित्र माना जाता है।

विजया एकादशी व्रत की पूजा विधि

विजया एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और साफ वस्त्र पहनने चाहिए। इसके बाद घर के मंदिर या पूजा स्थान को साफ कर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।

भगवान को पीले फूल, तुलसी दल, धूप, दीप और फल अर्पित करें। पूजा के दौरान विष्णु सहस्रनाम या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।

भक्त इस दिन फलाहार या निर्जल व्रत रखते हैं। दिनभर भगवान का ध्यान और भजन-कीर्तन करना भी लाभकारी माना जाता है। शाम के समय फिर से आरती कर भगवान से सुख-शांति की प्रार्थना की जाती है।

विजया एकादशी व्रत कथा का संबंध रामायण से

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विजया एकादशी का संबंध रामायण की कथा से जुड़ा हुआ है। कथा के अनुसार जब भगवान राम माता सीता को रावण से मुक्त कराने के लिए समुद्र तट पर पहुंचे, तो उनके सामने समुद्र पार करने की बड़ी चुनौती खड़ी थी।

तब एक ऋषि ने उन्हें एकादशी व्रत रखने की सलाह दी। कहा जाता है कि इस व्रत के पुण्य प्रभाव से उन्हें लंका पर विजय प्राप्त हुई। इसी कारण इस एकादशी को “विजया” नाम मिला, यानी विजय दिलाने वाली।

Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News न्यूज़ नहीं करता।

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