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मासूम की दर्दनाक मौत से दहला हरदा, आंगनबाड़ी से लौटते वक्त हुआ था लापता

Written by:Bhawna Choubey
Published:
आंगनबाड़ी से घर लौट रहा पांच साल का बच्चा अचानक गायब हुआ, सीसीटीवी से खंडहर स्कूल तक पहुंचा सुराग और देर रात शव मिलने से गांव में मातम छा गया, अब पूरी घटना की पुलिस जांच जारी है।
मासूम की दर्दनाक मौत से दहला हरदा, आंगनबाड़ी से लौटते वक्त हुआ था लापता

मध्य प्रदेश के हरदा जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। सुखरास गांव का पांच वर्षीय मासूम अनिल कोरकू रोज की तरह गुरुवार दोपहर आंगनबाड़ी गया था। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उसकी जिंदगी का आखिरी दिन साबित होगा।

दोपहर में जब बच्चे घर लौटने लगे तो अनिल घर नहीं पहुंचा। परिवार ने पहले सोचा कि वह आसपास खेल रहा होगा, लेकिन काफी देर तक खोजबीन के बाद भी जब उसका कोई पता नहीं चला तो परिजनों की चिंता बढ़ गई। गांव के लोगों ने भी बच्चे की तलाश शुरू की, लेकिन देर शाम तक कोई सुराग नहीं मिला।

सीसीटीवी फुटेज से मिला आखिरी सुराग

जब हर तरफ खोजबीन के बाद भी बच्चा नहीं मिला, तो गांव में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की गई। फुटेज देखने पर पता चला कि अनिल अकेले गांव के एक पुराने और बंद पड़े स्कूल की ओर जाता दिखाई दे रहा है।

इसके बाद ग्रामीण तुरंत उस खंडहरनुमा स्कूल पहुंचे। स्कूल पिछले करीब दो साल से बंद पड़ा है और वहां अक्सर सन्नाटा रहता है। ग्रामीणों ने परिसर में खोजबीन शुरू की और थोड़ी देर बाद वहां अनिल का शव मिला। यह दृश्य देखकर गांव में सनसनी फैल गई। मासूम की मौत की खबर सुनते ही पूरे गांव में मातम छा गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

गले पर चोट के निशान

घटना की जानकारी मिलते ही सिविल लाइन पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। थाना प्रभारी आरएस तिवारी ने बताया कि सीसीटीवी में बच्चा अकेले स्कूल की ओर जाता दिख रहा है।

प्रारंभिक जांच में बच्चे के गले पर चोट के निशान मिले हैं, जिससे मामला संदिग्ध माना जा रहा है। शव को जिला अस्पताल भेजा गया है, जहां पोस्टमार्टम के बाद ही मौत की असली वजह साफ हो सकेगी।

फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और आसपास के लोगों से पूछताछ भी की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बच्चा वहां अकेला कैसे पहुंचा और उसके साथ क्या हुआ।

एंबुलेंस देरी से पहुंची

घटना के बाद एक और समस्या सामने आई। शव मिलने के बाद काफी समय तक एंबुलेंस गांव नहीं पहुंच सकी। बताया जा रहा है कि करीब तीन घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार किया गया।

आखिरकार ग्रामीणों ने खुद ही एक निजी वाहन की व्यवस्था की और रात करीब साढ़े 11 बजे बच्चे के शव को जिला अस्पताल के लिए रवाना किया गया। इस देरी को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी भी देखने को मिली।

बंद पड़े स्कूल और बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल

इस घटना ने गांव में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर बंद पड़े भवनों और सुनसान जगहों की निगरानी क्यों नहीं होती। गांव में मौजूद खंडहर स्कूल लंबे समय से बंद पड़ा था, जहां सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं था।

ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे स्थान बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। अब लोग मांग कर रहे हैं कि ऐसे खाली भवनों को या तो सुरक्षित किया जाए या फिर वहां प्रवेश रोकने की व्यवस्था की जाए।

गांव में डर और गुस्से का माहौल

घटना के बाद गांव के लोगों में डर का माहौल है। माता-पिता अब अपने बच्चों को अकेले बाहर भेजने से डर रहे हैं। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि पहले बच्चे गांव में सुरक्षित घूमते थे, लेकिन अब हालात बदलते दिखाई दे रहे हैं। लोगों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी अगर कोई है तो उसे सख्त सजा मिले, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।

 

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