रीवा: मध्य प्रदेश के रीवा जिले में दो प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांटों के खिलाफ पिछले कई दिन से जल सत्याग्रह चल रहा है। ग्रामीणों और आदिवासी समुदाय के लोग परियोजना के प्रति अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं। इसी बीच, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी रविवार को रीवा जिले के मनगंवा पहुंचे जहां वह आदिवासी समुदाय और ग्रामीण लोगों के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुये।

उमंग सिंघार ने मनगवां विधानसभा क्षेत्र के ग्राम सरई में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ चल रहे आंदोलन के दौरान अपने प्राण गंवाने वाली विमला कोल को श्रद्धांजलि अर्पित की और आंदोलन में शामिल होकर प्रभावित लोगों की आवाज बुलंद की। इस दौरान उन्होंने कहा कि आदिवासी महिला विमला कोल का बलिदान व्यर्थ नहीं जाने देंगे। रीवा की जनता के स्वास्थ्य और अधिकारों के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे। सरकार को न्यूक्लियर पावर प्लांट की मंजूरी रद्द करनी ही होगी।

कौन हैं विमला कोल?

बता दें ​कि आदिवासी महिला विमला कोल परियोजना के विरोध में ग्रामीणों के साथ जल सत्याग्रह कर रही थीं। लेकिन एक दिन अचानक ही उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों की जांच के बाद उन्हें मृत ​घोषित कर दिया था। घटना के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल है, वहीं ग्रामीणों के विरोध और परियोजना को लेकर चल रहे विवाद ने फिर जोर पकड़ लिया है।

विकास के नाम पर हो रहे विनाश का करेंगे विरोध: उमंग सिंघार

नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि तानाशाही के चरम पर पहुंच चुकी यह सरकार अब अपने आखिरी दिन गिन रही है। उन्होंने रीवा जिले में घनी आबादी के बीच न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाये जाने के प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुये इसे सरकार की गैर-जिम्मेदाराना हरकत बताया है। सिंघार ने कहा कि.. नियमों को ताक पर रखकर आम आदिवासियों की जान से खिलवाड़ करते हुये सरकार आखिर किसे लाभ पहुंचाना चाहती है? हमारा विरोध विकास से नहीं, बल्कि ‘विकास’ के नाम पर किये जा रहे इस विनाश से है।

सिंघार ने सरकार से पूछे सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि जब कई देश न्यूक्लियर पावर प्लांट बंद कर रहे हैं तो रीवा में प्लांट लगाने की सरकार की क्या मजबूरी है? क्या सरकार को क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा और न्यूक्लियर प्रदूषण के संभावित खतरों की कोई चिंता नहीं है? उमंग सिंघार ने कहा किसानों की जमीन, जल संसाधनों, पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे उठाते हुये परियोजना के संभावित प्रभावों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।

ग्रामीणों को जमीन-जल और स्वास्थ्य पर असर की आशंका

वहीं पावर प्लांट का विरोध कर रहे ग्रामीणों को आशंका है कि प्रस्तावित परियोजना से उनकी जमीन, जल संसाधनों, पर्यावरण और स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। बताया गया है कि अक्टूबर में परियोजना स्थल पर शुरुआती जांच के लिये बोरिंग मशीनें पहुंचने के बाद विरोध तेज हुआ था। जिसके बाद ग्रामीणों ने काम रुकवा दिया था। ग्रामसभा में भी परियोजना के विरोध में प्रस्ताव पारित किये जाने की जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों ने परियोजना से संबंधित कथित अनापत्ति प्रमाण पत्र की जांच कराने की मांग भी उठाई है।