26 जनवरी का तोहफा: सागर सेंट्रल जेल से उम्रकैद काट रहे 9 बंदियों को आज मिलेगी आज़ादी

26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश सरकार की जेल सुधार नीति के तहत सागर सेंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे 9 कैदियों को विशेष छूट देकर रिहा किया जाएगा।
Sagar Central Jail

26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश सरकार की जेल सुधार नीति के तहत सागर सेंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे 9 कैदियों को विशेष छूट देकर रिहा किया जाएगा। यह फैसला सुधार, पुनर्वास और समाज में दोबारा सम्मानजनक जीवन की सोच को आगे बढ़ाता है।

मध्य प्रदेश सरकार ने 26 जनवरी को सागर सेंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे 9 कैदियों को रिहा करने का निर्णय लिया है। यह रिहाई सामान्य माफी नहीं बल्कि कैदियों के अच्छे आचरण लंबे समय तक जेल में बिताए गए वर्षों और सामाजिक पुनर्वास की संभावना को ध्यान में रखकर दी जा रही है।

गणतंत्र दिवस पर रिहाई

मध्य प्रदेश सरकार की जेल सुधार नीति का उद्देश्य सिर्फ़ अपराधियों को सजा देना नहीं बल्कि उन्हें बेहतर इंसान बनाकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का मौका देना है। इसी नीति के तहत सागर सेंट्रल जेल से 9 आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों को गणतंत्र दिवस के अवसर पर रिहा किया जा रहा है।

सरकार की गाइडलाइंस के मुताबिक, बलात्कार, POCSO एक्ट के तहत अपराध, सामूहिक हत्या और अन्य जघन्य अपराधों में दोषी पाए गए कैदियों को इस तरह की किसी भी राहत से पूरी तरह बाहर रखा गया है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि समाज की सुरक्षा और पीड़ितों के न्याय से कोई समझौता न हो।

जेल के भीतर प्रशिक्षण

सागर सेंट्रल जेल में बंद इन कैदियों के लिए जेल सिर्फ़ सजा का स्थान नहीं रही बल्कि एक प्रशिक्षण केंद्र की तरह काम करती रही है। जेल प्रशासन ने बताया कि कैदियों को सजा के दौरान सिलाई, बढ़ईगीरी, लोहार का काम, कंस्ट्रक्शन, प्रिंटिंग और अन्य व्यावसायिक कार्यों का प्रशिक्षण दिया गया है।

जेल अधिकारियों का मानना है कि यदि रिहा होने के बाद किसी व्यक्ति के पास रोजगार का साधन और कौशल हो तो उसके दोबारा अपराध की दुनिया में लौटने की संभावना काफी कम हो जाती है। इसी सोच के साथ प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

अब साल में पांच बार होगी रिहाई

मध्य प्रदेश सरकार ने कैदियों की रिहाई से जुड़ी नीति में एक अहम बदलाव किया है। पहले तक विशेष अवसरों पर कैदियों की रिहाई साल में चार बार होती थी, जिसमें गणतंत्र दिवस, अंबेडकर जयंती, स्वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती शामिल थे। लेकिन अब इसमें 15 नवंबर को मनाया जाने वाला ‘राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस’ भी जोड़ दिया गया है। इस बदलाव के बाद अब साल में कुल पांच मौकों पर पात्र कैदियों को रिहाई का अवसर मिलेगा।

Bhawna Choubey
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