सागर जिले के देवरी क्षेत्र में एक अफवाह ने देखते ही देखते बड़ी कानून-व्यवस्था की चुनौती पैदा कर दी। दरअसल राजा बाबा सिद्ध क्षेत्र के जंगल में कीमती पत्थर, सोना और प्राचीन वस्तुएं मिलने की चर्चा फैलते ही हजारों लोग फावड़े, गैती और सब्बल लेकर जंगल पहुंच गए। कई दिनों से चल रही इस गतिविधि ने वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने के साथ प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है।
दरअसल शनिवार को जब पुलिस लोगों को जंगल से हटाने पहुंची तो हालात अचानक बिगड़ गए। भीड़ के एक हिस्से ने पुलिस टीम पर पथराव कर दिया, जिसमें एक प्रधान आरक्षक घायल हो गया और पुलिस वाहन का कांच भी टूट गया। इसके बाद अतिरिक्त पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी।
अफवाह कैसे बनी बड़ी भीड़ का कारण?
वहीं जानकारी के अनुसार देवरी के ग्राम पंचायत सिंगपुर गंजन से लगे राजा बाबा सिद्ध क्षेत्र के जंगल में पिछले करीब 10 दिनों से यह चर्चा फैल रही थी कि वहां जमीन के नीचे बहुमूल्य पत्थर, जवाहरात, सोने की मालाएं और प्राचीन धातु की वस्तुएं मिल रही हैं। इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अफवाह इतनी तेजी से फैली कि आसपास के कई गांवों से बड़ी संख्या में लोग जंगल पहुंचने लगे। ग्रामीण छोटे-छोटे समूह बनाकर अलग-अलग स्थानों पर खुदाई करने लगे। इससे जंगल के कई हिस्सों में गड्ढे बन गए और वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई। इससे पहले भी वन विभाग और रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने लोगों को वहां से हटाया था, लेकिन अगले ही दिन फिर बड़ी संख्या में लोग लौट आए।
पुलिस पर पथराव के बाद प्रशासन सख्त
दरअसल शनिवार को थाना प्रभारी हरिराम मानकर पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और लोगों को जंगल से बाहर निकालने की कोशिश की। इसी दौरान कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। घटना में एक प्रधान आरक्षक घायल हो गया, जबकि पुलिस वाहन को भी नुकसान पहुंचा। बाद में एसडीएम अतिरिक्त पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक अधिकांश लोग जंगल छोड़कर जा चुके थे। ग्राम सरपंच कृष्ण कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि पिछले कई दिनों से अलग-अलग गांवों के लोग लगातार जंगल में खुदाई कर रहे थे। प्रशासन अब पूरे मामले की जांच कर रहा है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस अफवाह की शुरुआत कहां से हुई। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करें और बिना अनुमति संरक्षित वन क्षेत्र में प्रवेश या खुदाई जैसे काम न करें।






