यहां गांव में बार-बार लग रही आग, लोग मान रहे दैवीय प्रकोप, कर रहे हवन पूजन

यहां गांव में बार-बार लग रही आग, लोग मान रहे दैवीय प्रकोप, कर रहे हवन पूजन

सागर| विनोद जैन| एक तरफ जहां पूरी दुनियां कोरोना वायरस से परेशान है और देश में लाक डाउन के कारण लोगों को घरों से बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ सागर जिले के सुरखी थाना क्षेत्र के ग्राम अगरा में लोग प्रतिदिन की दिन भर होनेवाली आगजनी से परेशान हैं और आग लगने का कारण भी अज्ञात है|

पिछले पांच दिनों से लगातार कभी खेत में कभी घरों में कभी हरे भरे आम के पेड में तो कभी जानवरो की हरी घास बरसीन सहित अनेकों जगह प्रतिदिन सात आठ बार आगजनी की घटना घटित हो रही है और लोगों को कारण समझ में नहीं आ रहा है तो लोगों ने इसको देवी देवताओं का कोप समझकर हवन पूजन , कन्याभोज शुरु कर दिया
सुबह से ही पानी के टीन रखकर बैठ जाते हैं लोग
पांच दिन से लगातार जारी घटना को देखते हुये लोग यह सोचकर सुबह से ही टीन सहित अन्य बर्तनों मे पानी भरकर बैठ जाते हैं कि न जाने कब कहां आग लग जाये और उसको बुझाने जाना पडे इन घटनाओं में एक खास बात यह भी है कि ये घटनायें केवल दिन के समय ही घटतीं हैं रात में नहीं वहीं इस मामलें में कुछ लोगों का सोचना यह भी है कि कोई शरारती तत्व कहीं रात में पोटाश तो नहीं रख देता है जिससे दिन के बडते तापमान और धूप के कारण पोटाश स्वत: ही जलने लगता हो और आग लग जाती हो
प्रशासन का अभी तक नहीं गया इस घटना पर ध्यान
ये घटनायें सामने आने के बाद एक सोचनीय पहलू यह भी है कि जहां प्रशासन सख्ती से लाक डाउन का पालन करवाने का दावा कर रहा है वही लगातार आग लगने और एक साथ पूरे गांव वाले आग बुझाने का सामूहिक प्रयास करता हैं हवन पूजन कन्याभोज भी होता है लेकिन प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं है लाक डाउन तोडना लोगों की मजबूरी बन चुका है और लोग सामुहिक रुप से पानी के इंतजाम के साथ गांव में बैंठे रहते है कि अचानक आग लगने की खबर मिलते ही सभी आग बुझा सकें

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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