फर्नीचर में छिपाई थी नशीली सामग्री, देखिये वीडियो

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पुष्पराज सिंह बघेल/सतना। ‘तू डाल डाल मैं पात पात’ नशे के कारोबारियों और पुलिस के बीच आजकल कुछ इसी तरीके से हालात देखे जा रहे हैं। सतना जिले में नशे के कारोबार में पुलिस के कसते शिकंजे से बचने के लिये तस्करों ने अनोखा तरीका अपनाना शुरू कर दिया है जिसे देखकर आप भी दंग रह जाएँगे।

सभापुर के बीरसिंहपुर कस्बे में अनिल गुप्ता नाम का व्यक्ति काफी समय से नशे के कारोबार में लिप्त था। पुलिस ने कई बार उसे घर के छापा मारा गया लेकिन हर बार पुलिस के हाथ खाली रहते थे। मंगलवार को मुखबिर की निशानदेही पर पुलिस ने एक बार फिर अनिल के घर दबिश दी और उसके घर के सारे फर्नीचर तोड़कर देखे। इस दौरान पुलिस ने जब पलंग तख्त की तलाशी ली तो हैरान रह गई, आरोपी ने इन फर्नीचरों के बीच में नशे की सामग्री छिपाकर रखी थी। पुलिस ने अपने हाथों से घर के सारे फर्नीचरों को तोड़कर 204 नशीली कफ सिरफ, 298 पत्ते नशीली टेबलेट, 800 पाव शराब,एक 12 बोर का देशी कट्टा एवं 2 जिंदा कारतूस मौके पर जप्त किये हैं। इनकी कुल कीमती 01 लाख 13 हजार 9 सौ 9 रुपये है।

पुलिस ने घर से अनिल गुप्ता और उसकी पत्नी को माल सहित हिरासत में लिया गया। वरिष्ठ अफसरों के निर्देश एनडीपीएस एक्ट 34(2), आबकारी अधिनियम और 25/27 आर्म्स एक्ट और एंटी डकैत की धारा 11/13 A/D एक्ट के तहत आरोपियों को गिरफ्तार कर मामला दर्ज कर लिया है। गिरफ्तार नशे का कुख्यात सौदागर अनिल उर्फ पिक्की उर्फ मुस्तफा का सभापुर पुलिस ने पूरे कस्बे में जुलूस निकाला। अब पुलिस ने दोनो आरोपियों को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया है ।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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