सीहोर।अनुराग शर्मा।
लॉक डाउन के चलते कई गरीब परिवारों के समाने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया विपदा की इस घड़ी में नगर के समाजसेवियों ने इन गरीब और जरूरत मंद परिवारों को भोजन पहुचाने का बीड़ा उठाया और सामग्री के लिए व्हटासप ग्रुप पर दान की अपील की गई देखते ही देखते नगर की जनता ने भी इस पुनीत कार्य मे अपना योगदान देना शरू कर दिया किसी ने सब्जी तो किसी ने आटा दाल तो किसी ने मसलों का इंतजाम कर दिया कई दानदाताओं ने नगद राशि के साथ साथ गैस की टंकी उपलब्ध करवान शरू कर दी बस फिर क्या था बंद पड़ी दीन दयाल रसोई फिर से पुर्नजीवित हो गई समाजसेवियों ने आपसी सहयोग रसोई के लिए आवश्यक सामग्री का इंतजाम बिना किसी शासकीय सहयोग के किया और दीन दयाल रसोई को जीवित कर रोजाना 2 हजार से अधिक लोगो के लिए भोजन की व्यवस्था शुरू की गई
लॉक डाउन में भी जारी दीन दयाल रसोई, रोजाना 2000 लोगों का भर रही पेट
Written by:Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है।
इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →






