मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के आष्टा क्षेत्र से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जावर तहसील के ग्राम डोडी में प्रशासन ने नकली घी बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। जिस घी को लोग भरोसे के साथ खरीदकर अपने घरों में इस्तेमाल कर रहे थे, वह असली नहीं बल्कि मिलावटी निकला। सोमवार शाम हुई इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
सोचिए अगर किसी के घर में रोज खाने में इस्तेमाल हो रहा घी ही नकली हो, तो यह सिर्फ धोखा नहीं बल्कि सेहत के साथ खिलवाड़ भी है। यही वजह है कि डोडी गांव में पकड़ी गई नकली घी फैक्ट्री का मामला गंभीर माना जा रहा है। प्रशासन ने मौके से 792 किलो नकली घी, सांची कंपनी के फर्जी रैपर और भारी मात्रा में पैकिंग सामग्री जब्त की है।
डोडी गांव में चल रही थी नकली घी फैक्ट्री
तहसीलदार ओमप्रकाश चोरमा के नेतृत्व में प्रशासन की टीम ने सोमवार शाम छापामार कार्रवाई की। यह कार्रवाई एसडीएम नितिन टाले के निर्देशन में की गई। टीम ने डोडी निवासी मानसिंह सेंधव के किराए के मकान पर दबिश दी, जहां नकली घी बनाने का काम चल रहा था।
जैसे ही टीम मौके पर पहुंची, वहां अफरा-तफरी मच गई। शुरुआती जांच में सामने आया कि यहां वनस्पति घी और अन्य सामग्री मिलाकर नकली घी तैयार किया जा रहा था। तैयार माल को सांची ब्रांड के नाम से बाजार में बेचा जा रहा था। इस पूरी कार्रवाई में 792 किलो नकली घी जब्त किया गया, जो अलग-अलग पैकिंग में तैयार था। नकली घी फैक्ट्री का यह खुलासा बताता है कि यह काम एक-दो दिन का नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहा था।
सांची कंपनी के फर्जी रैपर और पैकिंग सामग्री बरामद
छापे के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मौके से सांची कंपनी के नाम वाले फर्जी रैपर और पैकिंग सामग्री बड़ी मात्रा में मिली। इससे साफ होता है कि आरोपी असली जैसे दिखने वाले पैकेट तैयार कर बाजार में बेच रहा था।
सांची ब्रांड प्रदेश में एक भरोसेमंद नाम माना जाता है। लोग आंख बंद करके इस नाम पर भरोसा करते हैं। ऐसे में सांची के नाम पर नकली घी बेचना उपभोक्ताओं के साथ सीधा धोखा है।
प्रशासन अब यह जांच कर रहा है कि इतनी बड़ी मात्रा में फर्जी रैपर और पैकिंग सामग्री आरोपी तक कैसे पहुंची। क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था? क्या अन्य जिलों में भी इसी तरह का कारोबार चल रहा है? ये सवाल अब जांच के दायरे में हैं।
मुख्य आरोपी फरार, पुलिस तलाश में जुटी
एसडीएम नितिन टाले के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि कल्याणपुरा निवासी गौरव वर्मा इस अवैध कारोबार को संचालित कर रहा था। प्रशासन की टीम के पहुंचते ही मुख्य आरोपी मौके से फरार हो गया।
फिलहाल पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस नकली घी फैक्ट्री में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
792 किलो नकली घी जब्त, सैंपल जांच शुरू
प्रशासन ने जब्त की गई सभी सामग्री को अपने कब्जे में लेकर सुरक्षित रखा है। खाद्य विभाग की टीम भी सक्रिय हो गई है। नकली घी के सैंपल जांच के लिए भेजे जाएंगे ताकि यह पता चल सके कि इसमें किन पदार्थों का इस्तेमाल किया गया था।
आमतौर पर नकली घी में वनस्पति घी, सस्ते तेल और केमिकल मिलाए जाते हैं। यह सेहत के लिए बेहद हानिकारक हो सकता है। लंबे समय तक ऐसे मिलावटी उत्पादों का सेवन करने से पेट, लीवर और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
क्षेत्र में मचा हड़कंप, प्रशासन सख्त
डोडी गांव में हुई इस कार्रवाई के बाद आसपास के इलाकों में भी हलचल है। प्रशासन ने साफ कहा है कि दोषियों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संभावना है कि आने वाले दिनों में अन्य जगहों पर भी जांच अभियान चलाया जाएगा। खाद्य सुरक्षा विभाग अब बाजार में बिक रहे घी और अन्य खाद्य पदार्थों की सघन जांच कर सकता है।






