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नर्मदा में 11 हजार लीटर दूध प्रवाह! आस्था या बर्बादी, छिड़ी बहस

Written by:Bhawna Choubey
Published:
सीहोर में नर्मदा नदी में 11000 लीटर दूध प्रवाह का वीडियो वायरल होते ही लोगों में बहस तेज हो गई है। कोई इसे आस्था बता रहा है तो कोई बर्बादी।
नर्मदा में 11 हजार लीटर दूध प्रवाह! आस्था या बर्बादी, छिड़ी बहस

कभी-कभी एक छोटा सा वीडियो बड़ा सवाल खड़ा कर देता है। ऐसा ही एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें नर्मदा नदी में हजारों लीटर दूध बहाया जा रहा है। यह दृश्य जितना अनोखा है, उतना ही सोचने पर मजबूर भी करता है।

इस नर्मदा नदी दूध प्रवाह वीडियो ने लोगों को दो हिस्सों में बांट दिया है। एक तरफ वे लोग हैं जो इसे धार्मिक आस्था मान रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वे लोग हैं जो इसे संसाधनों की बर्बादी बता रहे हैं। यही वजह है कि यह मामला अब सिर्फ एक वीडियो नहीं, बल्कि एक बड़ी बहस बन गया है।

कहां और क्यों बहाया गया नर्मदा में दूध

यह पूरा मामला मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के सतदेव गांव का बताया जा रहा है। यहां स्थित श्री दादाजी दरबार पातालेश्वर महादेव मंदिर में चैत्र नवरात्र के मौके पर एक बड़ा धार्मिक आयोजन किया गया था।

इस आयोजन के तहत 18 मार्च से 7 अप्रैल तक 21 दिनों का महायज्ञ, शिव महापुराण कथा और दुर्गा पाठ जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी धार्मिक अनुष्ठान के दौरान 11000 लीटर दूध नर्मदा नदी में अर्पित किया गया।

यह नर्मदा दूध अभिषेक आयोजन आयोजकों के अनुसार पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया था। उनका कहना है कि यह परंपरा का हिस्सा है और इसे धार्मिक नजर से ही देखा जाना चाहिए।

वायरल वीडियो में क्या दिखा

वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि नदी के किनारे भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद हैं। पास में एक बड़ा टैंकर खड़ा है, जिससे लगातार दूध नदी में प्रवाहित किया जा रहा है।

जैसे-जैसे दूध नदी में बहता है, पानी का रंग बदलने लगता है। कुछ ही देर में नदी का पानी दूधिया सफेद दिखाई देने लगता है। यह दृश्य देखने में अलग जरूर लगता है, लेकिन यही तस्वीर लोगों के बीच सवाल भी खड़े कर रही है। श्रद्धालु वहां भक्ति में लीन नजर आते हैं, मंत्रोच्चार करते हैं और इस पूरे अनुष्ठान को धार्मिक रूप से पूरा करते हैं।

क्यों छिड़ी बहस

इस नर्मदा नदी दूध प्रवाह मामले में सबसे बड़ी बात यह है कि इसने आस्था और समझदारी के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया है। कुछ लोग इसे धार्मिक विश्वास से जोड़कर देख रहे हैं। उनका कहना है कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसमें सवाल उठाना गलत है। उनके अनुसार, भगवान को अर्पित किया गया दूध आस्था का प्रतीक है। वहीं दूसरी तरफ कई लोग इसे बर्बादी मान रहे हैं। उनका तर्क है कि देश में आज भी ऐसे लोग हैं जिन्हें पीने के लिए दूध नहीं मिलता, ऐसे में हजारों लीटर दूध नदी में बहाना गलत है।

पहले भी हो चुका है दूध अभिषेक

एक श्रद्धालु ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब नर्मदा नदी में दूध अर्पित किया गया है। इससे पहले भी 151 लीटर और 1100 लीटर दूध से अभिषेक किया जा चुका है। इस बार मात्रा ज्यादा होने के कारण मामला ज्यादा चर्चा में आ गया है। पहले छोटे स्तर पर होने वाले आयोजन अब बड़े स्तर पर होने लगे हैं, जिससे लोगों का ध्यान ज्यादा आकर्षित हो रहा है।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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