मध्य प्रदेश के मंदसौर में मंगलवार को एक भावुक तस्वीर देखने को मिली। करीब 40 डिग्री तापमान और तेज धूप के बीच छोटे-छोटे बच्चे अपने माता-पिता के साथ कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। इन बच्चों के हाथों में छाते थे, लेकिन चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दे रही थी। बच्चों और उनके परिवारों की मांग सिर्फ इतनी थी कि उन्हें आरटीई योजना के तहत मिला स्कूल प्रवेश दिलाया जाए।
धरने में शामिल पालकों का कहना है कि उनके बच्चों का चयन ऑनलाइन लॉटरी के जरिए सेंट थॉमस स्कूल में हुआ था। मोबाइल पर मैसेज आने के बाद वे स्कूल पहुंचे, लेकिन वहां प्रवेश देने से मना कर दिया गया। इसके बाद परिवार लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया।
आरटीई पोर्टल पर चयन
पालकों ने बताया कि उन्होंने आरटीई पोर्टल पर आवेदन भरते समय स्कूल का नाम देखकर ही फॉर्म भरा था। बाद में बच्चों का चयन भी हो गया और प्रवेश की अंतिम तारीख का मैसेज भी मिला। लेकिन जब माता-पिता बच्चों को लेकर स्कूल पहुंचे तो उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया गया कि यहां इस तरह के प्रवेश नहीं होते।
इसी बात से नाराज होकर परिवारों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि अगर एक बार चयन होने के बाद भी बच्चों को प्रवेश नहीं मिला तो भविष्य में वे आरटीई योजना का लाभ दोबारा नहीं ले पाएंगे। ऐसे में गरीब परिवारों के बच्चों की पढ़ाई बीच में अटक सकती है।
अधिकारियों ने समझाया
धरने की सूचना मिलते ही शिक्षा विभाग और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने बच्चों और पालकों को धूप से हटकर छांव में बैठने की अपील की। शुरुआत में प्रदर्शनकारी नहीं माने, लेकिन बाद में अधिकारियों की समझाइश के बाद वे कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर पहुंचे।
जिला कलेक्टर आदिति गर्ग और अपर कलेक्टर एकता जयसवाल ने भी पालकों की बात सुनी और उचित समाधान का भरोसा दिलाया। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
बच्चों की पढ़ाई को लेकर बढ़ी चिंता
इस पूरे मामले ने आरटीई व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पालकों का कहना है कि अगर ऑनलाइन लॉटरी में चयन होने के बाद भी स्कूल प्रवेश नहीं देंगे, तो गरीब परिवार आखिर कहां जाएंगे। बच्चों की पढ़ाई और भविष्य दोनों दांव पर लग गए हैं।
धरने में शामिल जिला पंचायत सदस्य दीपक सिंह गुर्जर ने कहा कि शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है। गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को स्कूल से दूर रखना गलत है। उन्होंने प्रशासन से तुरंत कार्रवाई कर बच्चों को न्याय दिलाने की मांग की।






