Teachers Day: अतिथि शिक्षकों ने काली पट्टी बांध कर किया प्रदर्शन

Teachers Day: अतिथि शिक्षकों ने काली पट्टी बांध कर किया प्रदर्शन

सीहोर, अनुराग शर्मा| अतिथि शिक्षकों (Guest Teacher) के हित में उपचुनाव (Byelection) से पहले नीति बनवाकर भविष्य सुरक्षित करने की मांग को लेकर शनिवार को टाउन हाल के पास अतिथि शिक्षिकों ने काली पटटी बाजू पर बांधकर प्रदर्शन किया। अतिथि शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) के नाम डिप्टी कलेक्टर प्रगति वर्मा को ज्ञापन दिया।

शासकीय विद्यालयों में लगभग सत्तर हजार अतिथि शिक्षक बहुत ही अल्प मानदेय पर विगत तेरह वर्षो से सेवाएं दे रहे हैं। जिनको जुलाई अगस्त में सेवा में लेकर कभी भी सेवा से पृथक कर दिया जाता है । वर्ष भर सेवा करने के बाद भी अतिथि शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित नहीं है । असुरक्षित भविष्य और आर्थिक तंगी की वजह से पचास से अतिथि शिक्षक आत्महत्या कर चुके हैं । अतिथि शिक्षक लम्बे समय से मुख्यमंत्री से नीति बनाकर भविष्य सुरक्षित करने की मांग कर रहे है।

अतिथि शिक्षकों की मांग है कि अनुभवी अतिथि शिक्षकों के लिए वरिष्ठता के आधार पर गुरुजियों की तरह नियुक्ति व नियमितीकरण किए जाने, अतिथि शिक्षकों को कार्य वरिष्ठता के आधार पर पुन: काम पर नियमितीकरण की प्रक्रिया अपनाई जाने वर्तमान में कार्यरत व काम से बाहर कर दिए गये अतिथि शिक्षकों का वापस लेने। अनुभव के अंक प्रति सत्र या प्रति सत्र के समान उचित कार्य दिवस आधार पर वरिष्ठता का क्रम बनाते हुए रोजगार दिया जाए। अतिथि शिक्षकों की मांग की अनदेखा किया जाता रहा है। अतिथि शिक्षकें की सभी मागों पूरी जाए। ाल तक आयु का बंधन नहीं मानते ह सतत् सेवा में बनाए रखा जाये । ज्ञापन देने वालों में अनवर अहमद कुरेशी, कमलेश कटारे, लखन राठौर, सुनील वर्मा, गेंदालाल केसरिया, देवेंद्र शाक्य, मुकुल, आनंद राठौर, रामस्वरूप गुर्जर, राहुल व्यास, बलवीर सिंह सिसोदिया, पर्वत सिंह चंद्रवंशी, मनोहर वर्मा, अमृत सिंह, जगदीश बारेला, सुरेश बामणिया अतिथि शिक्षक आदि शामिल रहे।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews