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लोकायुक्त का एक्शन, नायब तहसीलदार रिश्वत लेते गिरफ्तार, राजस्व निरीक्षक की भूमिका जाँच के घेरे में

Written by:Atul Saxena
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लोकायुक्त द्वारा किए गए सत्यापन में 22 नवंबर को नायब तहसीलदार द्वारा 4,000 रुपये और 23 नवंबर को आरआई द्वारा 8,000 रुपये की मांग की पुष्टि हुई।
लोकायुक्त का एक्शन, नायब तहसीलदार रिश्वत लेते गिरफ्तार, राजस्व निरीक्षक की भूमिका जाँच के घेरे में

lokayukta police action

मध्य प्रदेश में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार करने वालों पर सख्त एक्शन लेने के निर्देश हैं, बावजूद इसके घूसखोर शासकीय सेवक अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे, ऐसे ही भ्रष्ट अधिकारी को रीवा लोकायुक्त पुलिस की टीम ने रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा है।

मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार पर नकेल कसने की लोकायुक्त की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में मंगलवार को लोकायुक्त रीवा की टीम ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए नायब तहसीलदार महेंद्र कुमार कोल को 4,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। मामले में राजस्व निरीक्षक हरी प्रसाद वैश की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिस पर आगे की कार्रवाई जारी है।

सरकारी आदेश का आदेश पालन करने मांगी रिश्वत  

शिकायतकर्ता प्रवीण चतुर्वेदी ने 0.800 हेक्टेयर भूमि विवाद के मामले में 2017 में बेदखली आवेदन लगाया था। 8 सितंबर 2021 को आदेश पारित होने के बावजूद चार वर्षों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस दौरान नायब तहसीलदार महेंद्र कोल और राजस्व निरीक्षक हरी प्रसाद वैश ने आदेश पालन के लिए 15,000 रुपये की रिश्वत मांग की।

नायब तहसीलदार और आरआई ले चुके 12000  

लोकायुक्त द्वारा किए गए सत्यापन में 22 नवंबर को नायब तहसीलदार द्वारा 4,000 रुपये और 23 नवंबर को आरआई द्वारा 8,000 रुपये की मांग की पुष्टि हुई। इसके बाद 25 नवंबर को बैरीटोला खुर्द स्थित शासकीय आवास में ट्रैप कार्रवाई कर नायब तहसीलदार को 4000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत दर्ज की गई है। टीम का नेतृत्व उप पुलिस अधीक्षक प्रवीण सिंह परिहार ने किया।

राघेवन्द्र सिंह गहरवार की रिपोर्ट 

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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