Hindi News

PM Awas Yojana : 4 साल तक एक रुपया नहीं मिला, हितग्राही को थमा दिया 25 हजार की वसूली का नोटिस

Reported by:Raghvendra Singh Gaharwar|Edited by:Atul Saxena
Published:
PM Awas Yojana : 4 साल तक एक रुपया नहीं मिला, हितग्राही को थमा दिया 25 हजार की वसूली का नोटिस

PM Awas Yojana Scam Singrauli

सिंगरौली जिले में जनपद पंचायत वैढन के अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना में ग्राम पंचायत ढेंकी से ऐसा मामला सामने आया है, जिसने योजना की जमीनी हकीकत और पंचायत स्तर पर चल रही कथित मनमानी को बेनकाब कर दिया है। यहां एक हितग्राही को बिना एक रुपया मिले ही 25 हजार रुपए की वसूली का नोटिस थमा दिया गया।

पीएम आवास के हितग्राही बेनीराम शुक्ला का दावा है कि पिछले चार वर्षों में उन्हें न तो कभी यह बताया गया कि उन्हें आवास स्वीकृत हुआ है, न किसी निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई और न ही उनके बैंक खाते में योजना की कोई किस्त आई। इसके बावजूद ग्राम पंचायत ढेंकी के सचिव धनुकधारी सिंह द्वारा उन्हें 25 हजार रुपए के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए नोटिस दिया गया।

नोटिस ने खोली योजना की पोल

नोटिस मिलने के बाद बेनीराम शुक्ला ने बैंक में अपने खाते की जांच करवाई। बैंक रिकॉर्ड में साफ हुआ कि पीएम आवास योजना की एक भी राशि उनके खाते में कभी जमा नहीं हुई। सवाल यह है कि जब पैसा खाते में आया ही नहीं, तो उसका दुरुपयोग कैसे हो गया?

चार साल तक किसकी मिलीभगत?

गंभीर सवाल यह है कि चार साल तक सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, पंचायत इंजीनियर, सेक्टर प्रभारी और सेक्टर उपयंत्री ने न हितग्राही को सूचना दी,न आवास निर्माण कराया और न ही खाते में राशि की स्थिति स्पष्ट की। तो फिर पीएम आवास की राशि कहां गई? और किसके संरक्षण में यह पूरा खेल चलता रहा?

वसूली किससे, गलती किसकी?

बिना पैसा दिए हितग्राही से वसूली का नोटिस देना इस बात का संकेत है कि या तो रिकॉर्ड में हेराफेरी की गई है, या फिर किसी और के नाम से उठाई गई राशि को छुपाने की कोशिश हो रही है। सवाल यह भी है कि क्या हितग्राही को डराकर मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है?

अब प्रशासन की परीक्षा

यह मामला सिर्फ एक हितग्राही का नहीं, बल्कि पूरी पीएम आवास योजना की पारदर्शिता पर सवाल है। अब निगाहें जिला पंचायत सीईओ और भ्रष्टाचार पर सख्त माने जाने वाले जिला कलेक्टर पर टिकी हैं। क्या दोषी पंचायत के सचिव,रोजगार सहायक और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी, या फिर इस लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार पर पर्दा डाल दिया जाएगा? ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।