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सिंगरौली: सड़क नहीं तो खाट बनी एंबुलेंस, 1 KM पैदल चलकर गर्भवती को पहुंचाया अस्पताल

Written by:Ankita Chourdia
Published:
मध्य प्रदेश के सिंगरौली में सड़क के अभाव में एक गर्भवती महिला को खाट पर लिटाकर अस्पताल ले जाना पड़ा। परिवार वाले करीब एक किलोमीटर पैदल चलने के बाद उसे मुख्य सड़क तक पहुंचा सके। इस घटना ने जिले की बदहाल स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सिंगरौली: सड़क नहीं तो खाट बनी एंबुलेंस, 1 KM पैदल चलकर गर्भवती को पहुंचाया अस्पताल

मध्य प्रदेश के सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले जिलों में शुमार सिंगरौली से एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली की तस्वीर सामने आई है। यहां सरई क्षेत्र के खनुआ गांव में सड़क न होने के कारण एक गर्भवती महिला को एंबुलेंस नसीब नहीं हुई। प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला को उसके परिजन खाट पर लिटाकर करीब एक किलोमीटर पैदल चले, तब जाकर उसे मुख्य सड़क से अस्पताल के लिए वाहन मिल सका। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

जानकारी के मुताबिक, यह मामला सोमवार देर रात का है। खनुआ गांव निवासी रवि पांडेय की पत्नी को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिवार ने एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन गांव तक पक्की सड़क न होने के कारण वाहन घर तक नहीं पहुंच सका। समय बीतता देख परिवार ने एक साहसिक लेकिन दर्दनाक फैसला लिया।

खाट पर 1 किलोमीटर का सफर

मजबूरी में महिला के पति, देवर और जेठानी ने उसे एक खाट पर लिटाया और उबड़-खाबड़ रास्ते पर पैदल ही मुख्य सड़क की ओर निकल पड़े। करीब एक किलोमीटर का यह सफर तय करने के बाद वे मुख्य सड़क तक पहुंचे, जहां से एक ऑटो के जरिए महिला को सरई के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

मात्र 5 मीटर का पुल बन जाए तो दूर हो समस्या

इस पूरे मामले पर ग्राम पंचायत खनुआ के सरपंच मोतीलाल सिंह ने बताया कि गांव के रास्ते में एक नाला पड़ता है, जिस पर महज 5 मीटर लंबे एक छोटे पुल की जरूरत है। उन्होंने कहा, “अगर यह पुल बन जाए तो 20 से 25 घरों की बस्ती सीधे मुख्य मार्ग से जुड़ जाएगी। पुल न होने के कारण रास्ता बंद रहता है और ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।”

विपक्ष ने सरकार को घेरा

इस घटना के बाद प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य और पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने सरकार पर निशाना साधा।

“प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर हैं। स्वास्थ्य मंत्री विंध्य क्षेत्र से ही हैं और सिंगरौली में सांसद से लेकर विधायक तक सभी भाजपा के हैं, इसके बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। सरकार के दावे बड़े-बड़े हैं, पर जमीनी हकीकत दयनीय है।” — कमलेश्वर पटेल, पूर्व मंत्री

पटेल ने यह भी आरोप लगाया कि सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले सिंगरौली जिले का DMF फंड दूसरे जिलों में भेज दिया जाता है, जबकि यहां की जनता भगवान भरोसे है। वहीं, मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने भी X पर पोस्ट कर इस मामले पर सरकार से जवाब मांगा है। गौरतलब है कि सिंगरौली में इस तरह की यह कोई पहली घटना नहीं है, पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं।

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