सोनभद्र: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में हुए दर्दनाक खदान हादसे के बाद खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। इस हादसे में अब तक मलबे से 7 मजदूरों के शव निकाले जा चुके हैं। DGMS की उच्च-स्तरीय टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया है, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
डिप्टी डायरेक्टर जनरल माइन सेफ्टी के नेतृत्व में जांच टीम ने पाया कि ओबरा थाना क्षेत्र में स्थित कृष्णा माइनिंग में सुरक्षा मानकों की बड़े पैमाने पर अनदेखी की जा रही थी। यह हादसा नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे खनन का नतीजा है।
माइंस एक्ट का खुला उल्लंघन
DGMS की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि खदान में खनन कार्य उस हिस्से में किया जा रहा था, जिसे प्रतिबंधित घोषित किया गया था। यह माइंस एक्ट का सीधा और गंभीर उल्लंघन है। टीम को मौके पर कई अन्य गंभीर अनियमितताएं भी मिली हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, कृष्णा माइनिंग का संचालन माइंस एक्ट की धारा 22/3 का उल्लंघन करते हुए किया जा रहा था। इस धारा के तहत असुरक्षित स्थितियों में खनन कार्य को रोकने का प्रावधान है, लेकिन खदान प्रबंधन ने इसकी पूरी तरह से अनदेखी की।
खदान मालिक पर भी गिरेगी गाज
जांच टीम ने स्पष्ट किया है कि इस हादसे के लिए सिर्फ प्रबंधन ही नहीं, बल्कि खदान मालिक को भी जिम्मेदार माना जाएगा। DGMS द्वारा तैयार की जा रही विस्तृत रिपोर्ट में मालिक की जवाबदेही तय की जाएगी और उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि मजदूरों की सुरक्षा से खिलवाड़ अक्षम्य है।
अन्य खदानों की भी होगी समीक्षा
इस बड़ी घटना से सबक लेते हुए DGMS ने सोनभद्र और आसपास के इलाकों में संचालित अन्य खदानों की भी समीक्षा करने का फैसला किया है। टीम यह सुनिश्चित करेगी कि अन्य खदानों में सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं। इसके अलावा, भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए राज्य सरकार के साथ मिलकर नए और सख्त नियम बनाने पर भी एक बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि खनन उद्योग में मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।






