पहले टेस्ट में भारतीय टीम का प्रदर्शन लगभग तीन दिन तक बेहतर रहा, लेकिन आखिरी दो दिनों में इंग्लैंड ने बाज़ी मार ली। खासकर शार्दुल ठाकुर को बतौर ऑलराउंडर प्लेइंग XI में चुना गया था, लेकिन वो गेंदबाजी में प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे। उन्होंने दोनों पारियों को मिलाकर सिर्फ 16 ओवर डाले और केवल दो विकेट लिए। वहीं बल्लेबाजी में भी वो कुछ खास नहीं कर पाए और कुल पांच रन ही बना सके। ऐसे में दूसरे खिलाड़ी की जगह उन्हें खिलाने के फैसले पर अब सवाल उठने लगे हैं।
दरअसल दूसरे टेस्ट में टीम इंडिया के गेंदबाजी अटैक में बदलाव तय माना जा रहा है। पूर्व कप्तान दिलीप वेंगसरकर ने साफ कहा कि शार्दुल या प्रसिद्ध कृष्णा में से किसी की जगह कुलदीप यादव को खिलाना चाहिए। स्पिन-फ्रेंडली पिचों को देखते हुए कुलदीप की मौजूदगी टीम को फायदा दे सकती है।
संजय मांजरेकर ने भी कुलदीप यादव को शामिल करने की कही बात
दरअसल पूर्व खिलाड़ी संजय मांजरेकर ने भी कहा, “कुलदीप यादव को वापस लाना होगा। पिच और परिस्थितियों को देखते हुए एक अतिरिक्त स्पिनर की जरूरत है और इसके लिए शार्दुल को बाहर बैठना पड़ सकता है।” उन्होंने नीतीश रेड्डी पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि वह चौथे तेज गेंदबाज के रूप में भरोसेमंद विकल्प नहीं बन सके। इसीलिए टीम को एक बैलेंस बनाते हुए कुलदीप को अंतिम एकादश में शामिल करना होगा।
गंभीर ने किया कप्तान का बचाव
हालांकि गौतम गंभीर ने टीम मैनेजमेंट और कप्तान शुभमन गिल के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि शार्दुल को स्पिनर से पहले गेंदबाजी न देना रणनीतिक फैसला था। उनके मुताबिक, जडेजा ने पहली पारी में नियंत्रण दिया, जिससे तीन प्रमुख तेज गेंदबाजों को ज्यादा गेंदबाजी करने का मौका मिला। गंभीर का कहना है कि कप्तान को हालात देखकर फैसले लेने होते हैं और पिच की स्थिति को देखकर गेंदबाजी में प्राथमिकताएं तय होती हैं। हालांकि, इस समर्थन के बावजूद खुद गंभीर ने भी यह नहीं कहा कि शार्दुल को अगला टेस्ट मिलना चाहिए या नहीं।
बता दें कि अगला टेस्ट एजबेस्टन में खेला जाना है, जहां टीम इंडिया को कभी जीत नहीं मिली है, ऐसे में प्लेइंग XI में बदलाव करके सबसे मजबूत कॉम्बिनेशन के साथ उतरना बेहद जरूरी हो गया है।






