गौतम गंभीर ने एक ऐसी बात कही, जिसने संजू सैमसन की पूरी वर्ल्ड कप कहानी को नया संदर्भ दे दिया। गंभीर ने साफ कहा कि खराब दौर के बावजूद उन्होंने संजू को इसलिए नहीं छोड़ा, क्योंकि उन्हें पहले से यकीन था कि यह बल्लेबाज बड़े मंच पर भारत को मैच जिताएगा।
यह भरोसा हल्का फैसला नहीं था। वर्ल्ड कप से ठीक पहले न्यूजीलैंड सीरीज में संजू 5 मैचों में सिर्फ 46 रन बना पाए थे, और टीम कॉम्बिनेशन में ईशान किशन आगे दिख रहे थे। शुरुआत में नामीबिया और जिम्बाब्वे के खिलाफ 22 और 24 रन की पारियां भी आईं, लेकिन वे बड़ी पारी में नहीं बदल सकीं।
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जब टीम फंसी, तभी निकला टूर्नामेंट का नया हीरो
दक्षिण अफ्रीका से 76 रन की हार के बाद भारत दबाव में था। यहीं से कहानी पलटी। वेस्टइंडीज के खिलाफ सुपर 8, इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल और न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल में संजू ने लगभग शतक वाली पारियां खेलीं और मैच का रुख बदल दिया।
गंभीर ने क्यों नहीं छोड़ा साथ
गंभीर ने पॉडकास्ट में कहा, “मैंने संजू सैमसन का पूरा साथ दिया क्योंकि मुझे हमेशा से लगा कि वह टीम के लिए बहुत बड़ा योगदान दे सकते हैं। हर खिलाड़ी के करियर में बुरा दौर आता है, जैसा उनके साथ न्यूजीलैंड सीरीज में हुआ था, पर वह खेल का हिस्सा है। मैंने उन्हें कुछ मैचों का आराम दिया और जब उन्होंने वापसी की, तो मुझे पता था कि वह हमारे लिए मैच जीतेंगे।”
कोच का तर्क सीधा था: जिस खिलाड़ी ने T20I में पहले ही तीन शतक लगाए हों, उसके लिए एक खराब चरण को अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। गंभीर ने माना कि संजू ने भरोसे को नतीजे में बदला।
321 रन, 199.37 स्ट्राइक रेट और विराट का रिकॉर्ड पीछे
संजू सैमसन ने T20 वर्ल्ड कप 2026 में 5 पारियों में 321 रन बनाए। औसत 80.25 रहा और स्ट्राइक रेट 199.37। उन्होंने 27 चौके और 24 छक्के लगाए, और टूर्नामेंट में तीसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे।
सबसे बड़ा आंकड़ा यह रहा कि उन्होंने विराट कोहली के 2014 के 319 रन का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। यानी किसी एक T20 वर्ल्ड कप में भारत के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने का नया रिकॉर्ड अब संजू के नाम है।
शुरुआत में बेंच, अंत में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट
टूर्नामेंट की शुरुआत में संजू नियमित प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं थे। उस वक्त चर्चा अभिषेक शर्मा, ईशान किशन और सूर्यकुमार यादव पर ज्यादा थी। लेकिन नॉकआउट के करीब आते-आते भारतीय बैटिंग का केंद्र बदल गया और टीम का भरोसा भी।
अंत में तस्वीर साफ थी: जिस खिलाड़ी पर चयन को लेकर सवाल थे, वही ट्रॉफी अभियान का सबसे बड़ा चेहरा बनकर निकला। अब टीम इंडिया के लिए संजू सिर्फ बैकअप विकल्प नहीं, बड़े मैचों का साबित मैच-विनर हैं।