मध्य प्रदेश के उज्जैन में सामने आए हनीट्रैप और फिरौती के मामले ने सभी को चौंका दिया है। दरअसल सोशल मीडिया के जरिए युवकों को जाल में फंसाकर उनका अपहरण करना, अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करना और फिर लाखों रुपये की फिरौती वसूलना इस गैंग का तरीका था। नानाखेड़ा थाना पुलिस ने महज 48 घंटे के भीतर इस पूरे गिरोह का खुलासा करते हुए 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि इस साजिश में शामिल मुख्य महिला आरोपी और एक अन्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश लगातार जारी है।
इंस्टाग्राम पर दोस्ती, नौकरी का झांसा और फिर शुरू हुई पूरी साजिश
वहीं पुलिस जांच के अनुसार ग्राम नरवर निवासी हैदर पटेल से इंस्टाग्राम पर ‘अंजलि राठौर’ नाम की एक फर्जी प्रोफाइल के जरिए संपर्क किया गया। बातचीत के दौरान युवती ने खुद को नौकरी की तलाश में बताया और धीरे-धीरे युवक का भरोसा जीत लिया। कुछ दिनों बाद उसने उज्जैन बुलाकर मिलने की बात कही। तय कार्यक्रम के अनुसार हैदर उससे मिलने पहुंचा। दोनों ने कुछ समय साथ बिताया और इसके बाद जब युवक उसे छोड़ने जा रहा था, तभी रास्ते में पहले से घात लगाए बैठे बदमाशों ने उसकी कार रोक ली।
आरोप है कि बदमाश युवक को जबरन अपने साथ ले गए, जहां उसके साथ मारपीट की गई और उसके कपड़े उतरवाकर अश्लील वीडियो बनाया गया। इसके बाद वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने और झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर उससे और उसके परिवार से मोटी रकम की मांग शुरू कर दी गई।
पहले की जाती थी रेकी, फिर चुना जाता था शिकार
वहीं पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि गिरोह किसी भी व्यक्ति को बिना जांचे-परखे निशाना नहीं बनाता था। आरोपी पहले ऐसे लोगों की जानकारी जुटाते थे जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी हो या जिनसे बड़ी रकम वसूली जा सके। पुलिस के मुताबिक, आरोपी इदरीश पटेल ने हैदर की आर्थिक स्थिति और उसकी सोशल मीडिया प्रोफाइल की जानकारी गिरोह तक पहुंचाई थी। इसके बाद युवती को उससे बातचीत करने और भरोसा जीतने की जिम्मेदारी दी गई।
मुलाकात तय होने के बाद पूरी वारदात को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया। आरोपियों ने युवक को एक कमरे में बंधक बनाकर रखा और उसके मोबाइल से परिवार के लोगों से संपर्क किया। पहले 50 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई, लेकिन बाद में सौदा 26 लाख रुपये में तय हुआ। पीड़ित परिवार ने गांव का मकान बेचकर 10 लाख रुपये की व्यवस्था की, जिसके बाद युवक को छोड़ा गया। हालांकि रिहाई के बाद भी आरोपियों ने बाकी रकम के लिए लगातार दबाव बनाया और धमकियां देते रहे। परेशान होकर आखिरकार पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की।
48 घंटे में पुलिस ने खोला पूरा राज, 11 आरोपी गिरफ्तार
दरअसल मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई। साइबर सेल और तकनीकी जांच की मदद से पुलिस ने महज 48 घंटे के भीतर पूरे गिरोह का पर्दाफाश कर दिया। पुलिस ने लोकेश शर्मा, राजपाल सिंह राठौड़, पंकज बमोरिया, यशवंत देवड़ा, आर्यन राठौर, मुकेश राठौर, लखन सिंह पंवार, इदरीश पटेल, आयुष जाटवा, इमरान उर्फ राजा पटेल और जयसिंह चौहान को गिरफ्तार किया है।
वहीं जांच में यह भी सामने आया है कि मुख्य आरोपी लोकेश शर्मा खुद को दबंग हिंदू सेना का संस्थापक बताता था। पुलिस अब फरार आरोपी दीपक राजपूत और मुख्य महिला आरोपी अंजलि ठाकुर की तलाश कर रही है। इसके लिए अलग-अलग टीमें रवाना की गई हैं।
पुलिस जांच में सामने आ सकते हैं और भी बड़े खुलासे
दरअसल पुलिस का मानना है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय हो सकता है और इसी तरीके से कई अन्य लोगों को भी हनीट्रैप का शिकार बनाया गया हो। फिलहाल आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों, सोशल मीडिया चैट, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया और फिरौती के जरिए कितनी रकम वसूली।






