जल्द ही ठंड आने वाली है और मौसम में इसका असर दिखाई देना शुरू हो गया है। अब इस बदलाव के चलते उज्जैन स्थिति श्री महाकालेश्वर की दिनचर्या में भी परिवर्तन किया जा रहा है। 27 अक्टूबर से बाबा महाकाल की तीन आरतियों का समय बदला जा रहा है। इसके अलावा दिन भर में होने वाले अन्य नियमों में भी परिवर्तन आएगा।
अब दाद्योदक और भोग आरती आधे घंटे देर से और संध्या आरती आधे घंटे पहले की जाएगी। इसी के साथ भगवान के स्नान करने की प्रक्रिया भी बदल दी जाएगी। रूप चौदस से भगवान को गर्म जल से स्नान कराने की शुरुआत होगी। बता दें कि ठंड में कार्तिक महीना और गर्मी में फाल्गुन महीने से बाबा महाकाल की दिनचर्या में बदलाव होता है।
ये भी पढ़ें
रूप चौदस से गर्म जल से स्नान
रूप चौदस पर तड़के जो भस्म आरती की जाती है। उसमें बाबा महाकाल को गर्म जल से स्नान करने की परंपरा शुरू होती है। इस मौके पर भगवान का विशेष श्रृंगार भी किया जाएगा। इस दिन पुजारी परिवार की महिलाएं भगवान को गर्म जल से स्नान कराकर उन्हें सुगंधित उबटन लगाएंगी। फाल्गुन महीने की पूर्णिमा तक यह परंपरा चलती है।
कब होगी कौन सी आरती
बाबा महाकाल की सुबह से लेकर रात तक की पूरी दिनचर्या में बदलाव होता है। भस्मा आरती के बाद होने वाली बालभोग आरती सुबह 7:30 से 8:15 तक होगी। भोग आरती सुबह 10:30 से 11:15 तक होगी। संध्या आरती का समय 6:30 से 7:15 रहेगा। भस्मा आरती तड़के 4 से 6 बजे तक और शयन आरती 10:30 से 11 बजे तक अपने निर्धारित समय पर ही होगी।
शरद पूर्णिमा पर खास भोग
शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर को मनाई जाने वाली है। इस अवसर पर बाबा महाकाल को संध्या आरती में केसरिया मीठे दूध का भोग लगाया जाएगा। शरद पूर्णिमा के दिन से सर्दी का आगमन माना जाता है। इस बार तिथि में उतार-चढ़ाव होने की वजह से आरती का समय 25 अक्टूबर को पड़ रही शरद पूर्णिमा की जगह 27 अक्टूबर से बदला जा रहा है।
