राजाधिराज बाबा महाकाल आज अपने भक्तों का हाल-चाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकलने वाले हैं। सावन भादो मास में हर सोमवार को महाकालेश्वर की सवारियां निकाली जाती है, जिसकी शुरुआत आज से हो रही है। हर सवारी के लिए एक अलग थीम रखी गई है। प्रशासन द्वारा पिछले कुछ दिनों से लगातार सवारी को लेकर तैयारियां की जा रही थी।
पहली सवारी की थीम वैदिक उद्बोधन रखी गई है। इसके तहत जब सवारी रामघाट पर पहुंचेगी तब यहां 1100 बटुक वैदिक मंत्रोच्चार का उद्घोष करेंगे। इसी उद्घोष के बीच शिप्रा के जल से पूजा अर्चना की जाएगी। इसके बाद सवारी परंपरागत मार्ग से होते हुए मंदिर पहुंचेगी।
शाम 4 बजे निकलेगी सवारी
महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सवारी की तैयारियां अंतिम चरण में है। शाम 4 बजे मंदिर के सभा मंडप में पूजा के बाद सवारी मुख्य द्वार पर पहुंचेगी। यहां सशस्त्र बलों की टुकड़ी बाबा महाकाल को सलामी देगी और सवारी का सिलसिला शुरू होगा।
ये रहेगा मार्ग
मंदिर से निकलकर सवारी कोट मोहल्ला, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी होते हुए रामघाट जाएगी। यहां पूजा के बाद रामानुजकोट, ढाबा रोड, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार से गुदरी होते हुए वापस मंदिर जाएगी। वहीं शाही सवारी शहर के टंकी चौराहा से मिर्जा नईमबेग मार्ग, तेलीवाड़ा, कंठाल, सती गेट जैसे इलाकों से भी निकलती है।
कब कब है सवारी
महाकाल की पहली सवारी आज यानी 3 अगस्त को है, जिसकी थीम वैदिक उद्बोधन रखी गई है। दूसरी सवारी 10 अगस्त को जिसमें विभिन्न लोक नृत्य दल शामिल होंगे। तीसरी सवारी 17 अगस्त को है। जिसमें पुलिस, आर्मी, होमगार्ड, विद्यालय और निजी बैंड की प्रस्तुति रहेगी। चौथी सवारी पर्यावरण संरक्षण की थीम पर 24 अगस्त को निकाली जाएगी। पांचवी सवारी 31 अगस्त को 84 महादेव की झांकी के साथ निकलेगी। 7 सितंबर को अंतिम और शाही सवारी सिंहस्थ महापर्व की झांकी के साथ निकाली जाएगी जिस पर ड्रोन से पुष्प वर्षा होगी।






