महाकाल मंदिर उज्जैन में रविवार सुबह बिहार सरकार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी ने भस्म आरती में हिस्सा लिया। दरअसल जेडीयू नेता भगवा वस्त्र पहनकर भगवान महाकाल की भक्ति में नजर आए। वहीं दर्शन के बाद उन्होंने मंदिर की आधुनिक व्यवस्थाओं, ऑनलाइन बुकिंग और श्रद्धालुओं के लिए किए जा रहे इंतजामों की सराहना की। वहीं बिहार में गांवों में टैक्स को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद पर भी उन्होंने अपनी पुरानी प्रतिक्रिया दोहराते हुए विपक्ष पर निशाना साधा।
दरअसल भगवा परिधान और हाथ में रुद्राक्ष की माला लिए अशोक चौधरी पूरे समय शिव भक्ति में लीन दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि महाकाल के दर्शन उनके लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत हैं और वे पिछले करीब 25 वर्षों से नियमित रूप से उज्जैन आ रहे हैं। उनके अनुसार हर साल मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं पहले से बेहतर होती जा रही हैं।
महाकाल मंदिर की व्यवस्थाओं पर क्या बोले अशोक चौधरी?
वहीं दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में अशोक चौधरी ने महाकाल मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन की व्यवस्थाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या के बावजूद दर्शन व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और आसान हुई है। खासतौर पर ऑनलाइन बुकिंग, आधार आधारित टिकट व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन की उन्होंने प्रशंसा की। उनका कहना था कि सावन जैसे व्यस्त समय में लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं, ऐसे में बेहतर प्रबंधन करना बड़ी जिम्मेदारी होती है। उन्होंने माना कि प्रशासन लगातार नई सुविधाएं जोड़ रहा है, जिससे बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को काफी राहत मिल रही है। मंदिर प्रबंधन द्वारा किए जा रहे सुधारों को उन्होंने सकारात्मक पहल बताया और कहा कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने में ऐसी व्यवस्थाओं की अहम भूमिका होती है। इसी दिन महाकाल मंदिर में चलित भस्म आरती का आयोजन भी हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।
गांव में टैक्स विवाद पर भी मंत्री ने रखा अपना पक्ष
दरअसल महाकाल दर्शन के साथ-साथ बिहार की राजनीति से जुड़ा मुद्दा भी चर्चा में रहा। हाल के दिनों में बिहार सरकार के गांवों में टैक्स से जुड़े फैसले को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है। इसी विवाद पर अशोक चौधरी का पहले दिया गया बयान फिर चर्चा में आया। उन्होंने कहा था कि विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय संसाधनों की जरूरत होती है और विपक्ष बिना तथ्यों के मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रहा है। हालांकि महाकाल मंदिर में उन्होंने मुख्य रूप से धार्मिक यात्रा और दर्शन पर ही बात की, लेकिन राजनीतिक हलकों में उनके पुराने बयान को लेकर चर्चा जारी रही।






