मॉडल से साध्वी बनीं हर्षानंद गिरि एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनका सोशल मीडिया पर जारी किया गया वीडियो है, जिसमें उन्होंने कुछ संतों की आलोचना करते हुए कहा कि वे हर छोटी बात पर नाराज हो जाते हैं और उनकी निजी जिंदगी पर लगातार टिप्पणी करते हैं। उनके बयान के बाद धार्मिक और सामाजिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है।
दरअसल हर्षानंद गिरि ने कहा कि उनके खाने, पहनने, रहने या परिवार के साथ रहने जैसी निजी बातों पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि संतों का काम आध्यात्मिक मार्ग दिखाना है, न कि किसी की निजी पसंद या जीवनशैली पर फैसला सुनाना। उनके इस बयान पर सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग उनके समर्थन में हैं तो कुछ उनके विचारों से असहमति भी जता रहे हैं।
साध्वी हर्षानंद का बयान क्यों बना चर्चा का विषय?
दरअसल अपने वीडियो में हर्षानंद गिरि ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि कुछ संत उनकी हर बात से क्यों परेशान हो जाते हैं। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि “ये कौन से संत हैं, जो संत से ज्यादा सास बन गए हैं और हर बात पर मुंह फुला लेते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि उनके पहनावे, मेकअप, यात्रा और परिवार के साथ रहने को लेकर बार-बार सवाल उठाए जाते हैं। हर्षानंद के मुताबिक, संन्यास का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति अपनी सुरक्षा और व्यावहारिक जरूरतों को नजरअंदाज कर दे। उन्होंने कहा कि जब तक उनका अपना आश्रम नहीं बनता, तब तक माता-पिता के साथ रहना उनके लिए सबसे सुरक्षित विकल्प है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर कोई उन्हें परिवार से अलग रहने की सलाह देता है, तो क्या वह उनकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी लेने को तैयार है? उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब महिलाओं की सुरक्षा और धार्मिक संस्थानों की व्यवस्था को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है।
View this post on Instagram
आश्रम व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
इसके साथ ही हर्षानंद गिरि ने बताया कि गुरु पूर्णिमा के दौरान मीडिया ने उनसे सबसे पहले परिवार के साथ रहने को लेकर सवाल पूछा था। उनका कहना है कि कुछ लोगों का मानना है कि संन्यास लेने के बाद व्यक्ति का परिवार से कोई संबंध नहीं रहना चाहिए, लेकिन हर व्यक्ति की परिस्थितियां अलग होती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने पहले भी कुछ आश्रमों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी और व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताई थी। इसके अलावा उन्होंने यह आरोप भी लगाया था कि कुछ लोग सार्वजनिक जीवन में एक छवि पेश करते हैं, जबकि निजी जीवन में अलग तरीके से व्यवहार करते हैं। उनके इन बयानों के बाद संत समाज के एक वर्ग ने आपत्ति दर्ज कराई थी। उल्लेखनीय है कि हर्षा रिछारिया ने अप्रैल 2026 में उज्जैन में दीक्षा लेकर हर्षानंद गिरि नाम से संन्यास ग्रहण किया था। संन्यास के बाद भी उनके मेकअप, बाल रंगने और पारिवारिक जीवन को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। अब उन्होंने साफ किया है कि आध्यात्मिक जीवन का मतलब व्यक्तिगत सम्मान और सुरक्षा से समझौता करना नहीं है। फिलहाल उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इस पर समर्थन व विरोध दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।






