श्रावण मास के पहले दिन उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली है। दरअसल तड़के तीन बजे मंदिर के पट खुलते ही भस्म आरती शुरू हुई और “जय महाकाल” के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा। देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर सावन की शुरुआत को यादगार बनाया।
दरअसल सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे खास माना जाता है। इसी वजह से महाकाल मंदिर में हर साल इस अवधि में सबसे अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं। पहले दिन मंदिर प्रशासन ने तय समय पर सभी धार्मिक अनुष्ठान पूरे कराए। जलाभिषेक, पंचामृत स्नान, भस्म अर्पण और विशेष आरती के बाद भगवान महाकाल को राजसी स्वरूप में सजाया गया। दर्शन व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा, बैरिकेडिंग और अलग-अलग प्रवेश मार्गों की व्यवस्था भी की गई, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।
दिव्य श्रृंगार ने मोहा श्रद्धालुओं का मन
वहीँ श्रावण के पहले दिन होने वाली भस्म आरती का धार्मिक महत्व बेहद खास माना जाता है। परंपरा के अनुसार सबसे पहले भगवान महाकाल का पवित्र जल, दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से पंचामृत अभिषेक किया गया। इसके बाद वैदिक मंत्रों के बीच भस्म अर्पित की गई और विशेष पूजा संपन्न हुई। आरती के दौरान गर्भगृह में मौजूद अन्य देवी-देवताओं की भी विधि-विधान से पूजा की गई।
श्रृंगार के समय बाबा महाकाल को भांग, चंदन, त्रिपुंड, गुलाब के फूल, रुद्राक्ष की माला और चांदी के मुकुट से सजाया गया। साथ ही रजत शेषनाग, मुंडमाला और विभिन्न आभूषणों से उन्हें राजा स्वरूप दिया गया। इसके बाद मौसमी फल, मिठाई और अन्य प्रसाद का भोग लगाया गया। भस्म आरती में शामिल श्रद्धालुओं ने इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर खुद को सौभाग्यशाली बताया। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्ति गीत, शंखनाद और घंटियों की ध्वनि से पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा।
सावन में महाकाल मंदिर में विशेष व्यवस्था
दरअसल श्रावण मास के दौरान महाकाल मंदिर में सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसे देखते हुए मंदिर प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था में बदलाव किए हैं। सावन भर मंदिर के पट तड़के 3 बजे खोले जाएंगे, जबकि सोमवार को यह समय और पहले रखा गया है ताकि अधिक श्रद्धालु भस्म आरती और दर्शन का लाभ ले सकें। सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस बल, मेडिकल टीम, कंट्रोल रूम और भीड़ प्रबंधन की विशेष व्यवस्था भी की गई है।
सावन के हर सोमवार को निकलने वाली बाबा महाकाल की शाही सवारी भी इस बार आकर्षण का केंद्र रहेगी। इन सवारियों में भगवान महाकाल नगर भ्रमण पर निकलते हैं और हजारों श्रद्धालु मार्ग में दर्शन करते हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे तय दिशा-निर्देशों का पालन करें, ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों व्यवस्थाओं का उपयोग करें तथा भीड़ के दौरान धैर्य बनाए रखें।






