मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए गुरुवार सुबह 7 बजे से 291 मतदान केंद्रों पर वोटिंग शुरू हो गई है, जो शाम 6 बजे तक चलेगी। पोलिंग बूथों पर वोटर्स में उत्साह देखा जा रहा है।
जिला प्रशासन और चुनाव आयोग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। एसएसबी समेत 16 सुरक्षा कंपनियों के कुल 1,422 जवानों को तैनात किया गया है। संवेदनशील इलाकों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है । कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इलाके में ड्राई डे घोषित किया गया है। सीमावर्ती इलाकों में शराब की दुकानें भी बंद रहेंगी।
उपचुनाव में कुल 21 उम्मीदवार मैदान में है जो अपनी किस्मत आज़मा रहे हैं हालांकि मुख्य मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह और भाजपा के आशुतोष तिवारी के बीच माना जा रहा है। इसके अलावा आजाद समाज पार्टी के दामोदर यादव भी चुनाव मैदान में हैं जो कुछ क्षेत्रों को प्रभावित कर सकते हैं। दतिया उपचुनाव जीतना दोनों ही पार्टियों के लिए साख का सवाल है और वे जीत के लिए पूरी ताकत भी झोंक रही है। एक तरफ मोहन सरकार और भाजपा संगठन के लिए यह उपचुनाव एक बड़ी परीक्षा है वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के सामने इस सीट को बरकरार रखना बड़ी चुनौती है। हालांकि इसकी निर्णायक जनता है, जिसका फैसला सर्वमान्य होगा।
इस उपचुनाव में करीब 2.20 लाख से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। नतीजे 3 अगस्त 2026 को जारी होंगे। बता दें कि यह उपचुनाव कांग्रेस के तत्कालीन विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद कराया जा रहा है। बैंक एफडी धोखाधड़ी मामले में अदालत द्वारा तीन वर्ष की सजा सुनाए जाने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई थी।
मुख्यमंत्री ने वोटर्स से की ये अपील
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि पहले मतदान, फिर जलपान। दतिया विधानसभा के सभी मतदाताओं से आग्रह है कि लोकतंत्र के इस महापर्व में अपने मताधिकार का अवश्य प्रयोग करें। आपका वोट दतिया के उज्ज्वल भविष्य और मजबूत लोकतंत्र की नींव है। मत देकर विकसित भारत और विकसित मध्य प्रदेश के निर्माण में सहभागी बनें।
आज केवल मतदान नहीं, दतिया अपने भविष्य का निर्णय करेगा: जीतू पटवारी
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक्स पर लिखा है कि आज केवल मतदान नहीं होगा, दतिया अपने भविष्य का निर्णय करेगा। यह चुनाव दतिया के सम्मान, स्वाभिमान, सार्थक भविष्य और विकास का चुनाव है। जन-जन का एक-एक वोट यह तय करेगा कि जनता की आवाज़ बुलंद होगी या सत्ता का अहंकार!आइए, लोकतंत्र के इस महापर्व पर, सच-साहस के पक्ष में मतदान करें।
कौन है आशुतोष तिवारी
- आशुतोष तिवारी दतिया जिले के रहने वाले हैं। वे जमीनी पकड़ वाले नेता माने जाते हैं।
- आशुतोष तिवारी लंबे समय से संघ व संगठन में सक्रिय रहे हैं।
- पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के करीबी माने जाते हैं।
- छात्र जीवन से ही संघ (आरएसएस) से जुड़े रहे है।
- बीजेपी के संभागीय संगठन मंत्री रहे हैं
- वर्तमान में भाजपा के प्रदेश प्रकोष्ठ प्रभारी हैं।
- साल 2020 से 2023 के बीच वे एमपी हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन रह चुके हैं। उनके पास केबिनेट मंत्री का दर्जा था।
कौन है घनश्याम सिंह
- घनश्याम सिंह का ताल्लुक दतिया राजघराने से हैं। 72 वर्षीय घनश्याम सिंह दतिया के सियासी गलियारों में एक बेहद स्थापित नाम हैं।
- उनका ग्रामीण क्षेत्रों की जनता के बीच उनका पुराना और गहरा व्यक्तिगत प्रभाव है।ग्वालियर-चंबल अंचल में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में उनकी गिनती की जाती है।
वे दतिया से दो बार और सेवढ़ा से एक बार विधायक रह चुके हैं। - वर्ष 1993 में कांग्रेस के टिकट पर पहली बार दतिया विधानसभा चुनाव जीतकर भाजपा के शंभु तिवारी को हराया था
- 1998 में कांग्रेस ने उनका टिकट काटकर चंदन सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वे हार गए।
- 2003 में कांग्रेस ने दतिया से फिर घनश्याम सिंह को टिकट दिया और वे अवधेश नायक को हराकर विधानसभा पहुंचे।
- 2008 के चुनाव में वे बीजेपी के डॉ. नरोत्तम मिश्रा से हार गए। 2013 कांग्रेस ने उन्हें सेवढ़ा विधानसभा से मैदान में उतारा, लेकिन वे बीजेपी के प्रदीप अग्रवाल से हार गए।
- 2018 में फिर सिंह ने बीजेपी के राधेलाल बघेल को हराकर जीत दर्ज की ।2023 के विधानसभा चुनाव में सेवढ़ा से भाजपा प्रत्याशी प्रदीप अग्रवाल से हार गए।
अब एक बार फिर 18 साल बाद घनश्याम सिंह दतिया से चुनावी मैदान में उतरे हैं। - घनश्याम सिंह के पिता महाराज कृष्ण सिंह जू देव भी साल 1984 में कांग्रेस के टिकट पर भिंड-दतिया से लोकसभा के लिए चुने गए थे।






