आज राजसी भ्रमण पर निकलेंगे बाबा महाकाल, 6 स्वरूपों में देंगे दर्शन, 70 भजन मंडलियां होंगी शामिल

बाबा महाकाल आज रजत पालकी में सवार होकर अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकलेंगे। महाकाल 6 स्वरूपों में भक्तों को दर्शन देंगे।
Mahakal

आज उज्जैन में बाबा महाकाल (Mahakal) की शाही सवारी निकाली जाने वाली है। राजसी ठाठ बाट के साथ निकलने वाली इस सवारी में बैंड-बाजे, हाथी, घोड़े, बग्गी सब कुछ शामिल होंगे। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी सवारी का हिस्सा बनने वाले हैं। देशभर से 10 लाख श्रद्धालुओं के सवारी में शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।

आज राजाधिराज बाबा महाकाल अपने भक्तों को 6 रूपों में दर्शन देने वाले हैं। सवारी मार्ग 7 किलोमीटर लंबा रहेगा। 70 भजन मंडलीय शामिल होंगे और साधु संतों सहित पुलिस बैंड, महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी और पुरोहित नजर आएंगे। 10 ड्रोन से सवारी मार्ग में रजत पाल की पर पुष्प वर्षा भी की जाएगी।

आज महाकाल की शाही सवारी (Mahakal)

श्रावण भाद्रपद मास में बाबा महाकाल की सवारी निकलने का क्रम आज से नहीं बल्कि सदियों पुराना है। इसी क्रम में आज महाकाल की छठी और आखिरी सवारी 4 बजे मंदिर से रवाना होगी। रजत पालकी में चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर मन महेश, नंदी रथ पर उमा महेश, गरुड़ रथ पर शिव तांडव, डोल रथ पर होलकर स्टेट का मुखारविंद और अंतिम रथ पर सप्तधान मुखारविंद शामिल होगा।

कैसा रहेगा क्रम

पालकी में सबसे आगे महाकालेश्वर मंदिर का प्रचार वाहन, यातायात पुलिस, तोपची, रजत ध्वज, घुड़सवार, सशस्त्र बल, स्काउट गाइड, सेवा समिति के बैंड और 70 भजन मंडलियां शामिल होंगी।

इसके बाद रजत पालकी में चंद्रमौलेश्वर, भारत बैंड, शिव तांडव स्वरूप, रमेश बैंड, उमा महेश स्वरूप, गणेश बैंड, होल्कर स्टेट मुखौटा, RK बैंड, सप्तधान मुखौटा, राजकमल बैंड और आखिर में हाथी पर मन महेश विराजित होंगे।

जारी हुए नियम

शाही सवारी के दौरान श्रद्धालुओं के काफी भीड़ देखने को मिलती है। भीड़ नियंत्रण में रहे और सुरक्षा बनी रहे इसके लिए प्रशासन विशेष इंतजाम कर रहा है। सवारी मार्ग पर मोबाइल डिटेक्शन टीम तैनात रहेगी ताकि लोगों को सेल्फी लेने से रोका जा सके।

क्या रहेगा खास

ये महाकाल की अंतिम और राजसी सवारी है इसलिए काफी आकर्षक चीजें देखने को मिलने वाली है। धूलिया जनजाति का बाजा नृत्य, बालाघाट की बैगा जाति का करमा नृत्य और भुवनेश्वर का डंडा लोक नृत्य आकर्षण का केंद्र रहने वाला है। सवारी मार्ग में चलित रथ रहेगा जिससे एलईडी पर लाइव प्रसारण देखा जा सकेगा। इसके अलावा फ्रीगंज, दत्त अखाड़ा और नानाखेड़ा क्षेत्र में भी लोग लाइव प्रसारण देख सकेंगे।

Diksha Bhanupriy
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10 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में.

"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy →
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