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उज्जैन में युवाओं से बोले संघ प्रमुख मोहन भागवत, कहा – ‘अहंकार में मत जियो, धर्म को सिर्फ पूजा नहीं बल्कि आचरण बनाओ’

उज्जैन में युवा धर्म संसद को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने युवाओं से धर्म को केवल पूजा-पद्धति तक सीमित न रखने की अपील की। दरअसल उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को लगता है कि सब कुछ उनके नियंत्रण में है लेकिन यह गलतफहमी है।
उज्जैन में युवाओं से बोले संघ प्रमुख मोहन भागवत, कहा - 'अहंकार में मत जियो, धर्म को सिर्फ पूजा नहीं बल्कि आचरण बनाओ'

उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद के दौरान मोहन भागवत ने धर्म, युवाओं के जीवन, पर्यावरण और सामाजिक जिम्मेदारियों पर विस्तार से बात की। दरअसल उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं का आचरण ऐसा होना चाहिए जिससे दुनिया प्रेरणा ले सके। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जीवन में डर, लालच या किसी इच्छा की पूर्ति के लिए धर्म का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।

वहीं अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि धर्म का मतलब केवल पूजा-पाठ या किसी एक उपासना पद्धति तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि धर्म जीवन को सही दिशा में चलाने वाला अनुशासन है।

युवाओं को दिया यह संदेश

दरअसल मोहन भागवत ने उदाहरण देते हुए कहा कि सड़क पर ट्रैफिक नियमों का पालन करना सार्वजनिक जगह पर कचरा न फैलाना और दूसरों की आस्था का सम्मान करना भी धर्म का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि समय के साथ धर्म के अर्थ को लेकर भ्रम पैदा हुआ है। उनके मुताबिक पश्चिमी देशों ने भारत की धार्मिक परंपराओं और कर्मकांडों को देखकर उसे अपने यहां के रिलिजन के समान समझ लिया। बाद में भारत में भी धर्म को उसी अर्थ में देखने की प्रवृत्ति बढ़ी। मोहन भागवत ने कहा कि कर्मकांड धर्म का ही एक हिस्सा है लेकिन पूरा धर्म नहीं है। दरअसल युवाओं से उन्होंने कहा है कि किसी भी परिस्थिति में केवल स्वार्थ के आधार पर फैसले नहीं लेने चाहिए। सुख-दुख बदलते रहते हैं लेकिन जीवन के मूल सिद्धांत स्थायी रहते हैं और उन्हें व्यवहार में उतारना जरूरी है।

रामायण और गीता सिर्फ बुजुर्गों के लिए नहीं

इसके साथ ही मोहन भागवत ने कहा कि व्यक्ति जब यह सोचने लगता है कि हर चीज उसकी इच्छा के मुताबिक ही होनी चाहिए तब अहंकार पैदा होता है। उन्होंने युवाओं से कहा कि जीवन में संतुलन बनाए रखना और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना जरूरी है। दरअसल अपने संबोधन में उन्होंने पड़ोसी देश का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने कई बार मुश्किलों का सामना किया लेकिन अनावश्यक विवाद का रास्ता नहीं अपनाया। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर भारत ने दूसरों की मदद भी की और यह नहीं देखा कि वहां कौन सी विचारधारा की सरकार है। कार्यक्रम में उन्होंने यह भी कहा कि आज कई लोग गीता और रामायण जैसे ग्रंथों को केवल बुजुर्गों के लिए मानते हैं जबकि जीवन के हर दौर में उनसे सीख ली जा सकती है। उनके मुताबिक धर्म व्यक्ति को सही फैसले लेने की दिशा देता है और जीवन को संतुलित बनाने में मदद करता है।

Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
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