भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन उज्जैन में आयोजित दीपोत्सव कार्यक्रम से ठीक पहले शहर के प्रमुख संतों का आशीर्वाद लेने पहुंचे। उनके साथ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद रहे।
नेताओं के इस दौरे का मुख्य मकसद दीपोत्सव के पावन अवसर पर संतों से मुलाकात करना था, लेकिन इस दौरान आगामी सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों और अखाड़ा परिषद के बीच चल रहे अंदरूनी मतभेदों पर भी गंभीर चर्चा हुई।
नाव में सवार होकर पहुंचे बड़ा उदासीन अखाड़ा
दौरे की शुरुआत में नितिन नवीन और सीएम डॉ. मोहन यादव नाव पर सवार होकर बड़ा उदासीन अखाड़े पहुंचे। वहां उन्होंने युवा महंत सत्यानंद महाराज और महंत देवीदास से मुलाकात की। 27 वर्षीय महंत सत्यानंद वही संत हैं जिन्होंने विदेश की एक मल्टीनेशनल कंपनी का 26 लाख रुपये का सालाना पैकेज ठुकराकर संन्यास की राह चुनी थी। नेताओं ने अखाड़े में आचार्य जगद्गुरु श्री चंद्र भगवान के 532वें जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में विशेष पूजा-अर्चना की और संतों का आशीर्वाद लिया।
दत्त अखाड़े में पीर श्रीमहंत सुंदरपुरी से की मुलाकात
इसके बाद भाजपा नेताओं का काफिला रामघाट स्थित श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा पहुंचा। यहां उन्होंने अखाड़े के गादीपति पीर श्रीमहंत सुंदरपुरी महाराज से मुलाकात की, जो महज 3 साल की उम्र में नागा संन्यास परंपरा से जुड़ गए थे। नेताओं ने अखाड़े में शीश नवाया और संतों से विभिन्न धार्मिक व सामाजिक विषयों पर विचार-विमर्श किया।
सिंहस्थ कुंभ और अखाड़ा परिषद का भी उठा मुद्दा
इन मुलाकातों के बीच आगामी 2028 उज्जैन सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों पर मुख्य रूप से बात हुई। इसके साथ ही अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर अखाड़ों के बीच चल रही खींचतान भी चर्चा में आई। दरअसल, उदासीन अखाड़ा जहां महानिर्वाणी अखाड़े का समर्थन कर रहा है, वहीं दत्त अखाड़ा निरंजनी अखाड़े के महंत रवींद्रपुरी के पक्ष में खड़ा है। ऐसे में भाजपा नेतृत्व की दोनों अखाड़ों में मौजूदगी को कुंभ से पहले संतों के बीच बेहतर सामंजस्य बैठाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।






