उज्जैन में गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। हर वर्ष इस्कॉन मंदिर की तरफ से यह यात्रा निकाली जाती है और इस बार भी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। सबसे खास बात यह है कि इस बार भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा तीन अलग-अलग पारंपरिक रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करेंगे।
हर साल केवल पुरी में ही नहीं बल्कि उज्जैन में भी जगन्नाथ रथ यात्रा का उल्लास देखने को मिलता है। भक्त पलक पांवड़े बिछाकर रथ यात्रा का स्वागत करते हैं। इस बार यात्रा के मार्ग में भी परिवर्तन किया गया है।
तीन रथों पर होंगे दर्शन
जगन्नाथ रथ यात्रा का शहर में उल्लास देखने को मिलता है लेकिन इस बार भक्तों का उत्साह और भी बढ़ गया है क्योंकि उन्हें तीनों विग्रह अलग-अलग रथ पर देखने को मिलेंगे। प्रभु जगन्नाथ 33 फीट ऊंचे नदीघोष रथ पर विराजित होंगे। भगवान बलराम तालध्वज रथ पर सवार होंगे। माता सुभद्रा दर्पदलन रथ पर विराजित होंगी। तीनों रथों को बेहद खूबसूरती से सजाया गया है।
बंगाल के कारीगरों ने बनाई पोशाक
भगवान की पोशाक जापान से मंगाए गए खास मोती, डायमंड, जरी और धागों से तैयार की गई है। बंगाल के 10 कारीगरों ने दो महीने में इन रेशमी वस्त्रों को तैयार किया है। पोशाक पर धार्मिक प्रतीकों की कारीगरी भी की गई है।
यात्रा मार्ग बदला गया
इस बार यात्रा के मार्ग में परिवर्तन किया गया है। हर साल बुधवार क्षेत्र से निकलने वाली रथ यात्रा इस बार आगर रोड स्थित मंडी चौराहा से शुरू होगी। इसका स्वरूप और मार्ग दोनों ही बदला है ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु इसका हिस्सा बन सकें। यात्रा में रथ के साथ हाथी, घोड़े, बग्गी, कीर्तन मंडली और झांकिया आकर्षण का केंद्र रहने वाली है। देश विदेश से आए श्रद्धालु हरि नाम का संकीर्तन करते नजर आएंगे।
खाती मंदिर की यात्रा
इस्कॉन मंदिर के अलावा शहर में खाती समाज की ओर से भी हर वर्ष ढाबा रोड से भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक रथ यात्रा निकाली जाती है। इस बार सिंहस्थ की वजह से चल रहे सड़क निर्माण के कारण यात्रा का मार्ग छोटा किया गया है और यह केवल गोपाल मंदिर तक जाएगी।






