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सिंहस्थ 2028 से पहले बदलेगा उज्जैन का रूप, शिप्रा किनारे बनेगा भव्य रिवर फ्रंट

Written by:Bhawna Choubey
Published:
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच शिप्रा नदी तटों के विकास को मिली रफ्तार, घाटों का नया रूप, बेहतर सुविधाएं और स्वच्छ वातावरण श्रद्धालुओं को देगा सुरक्षित व यादगार अनुभव, जिससे उज्जैन धार्मिक और पर्यटन नक्शे पर और मजबूत होगा।
सिंहस्थ 2028 से पहले बदलेगा उज्जैन का रूप, शिप्रा किनारे बनेगा भव्य रिवर फ्रंट

सिंहस्थ का नाम आते ही करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, साधु-संतों की परंपरा और उज्जैन की आध्यात्मिक पहचान सामने आ जाती है। हर बार सिंहस्थ के दौरान शिप्रा नदी के घाटों पर लाखों लोगों की भीड़ उमड़ती है। इसी को ध्यान में रखते हुए अब प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है, जिससे आने वाले सिंहस्थ 2028 से पहले घाटों की तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है।

अब श्रद्धालुओं को टूटे-फूटे घाट, अव्यवस्थित रास्ते या भीड़ में परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। प्रशासन ने शिप्रा नदी के तटों को भव्य रिवर फ्रंट के रूप में विकसित करने के लिए 64.24 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दे दी है, जिससे घाटों की सुंदरता और सुविधाओं दोनों में बड़ा सुधार होगा।

सिंहस्थ 2028 से पहले क्यों जरूरी है शिप्रा रिवर फ्रंट विकास?

उज्जैन देश के सबसे पवित्र धार्मिक शहरों में से एक है। यहां हर 12 साल में लगने वाला सिंहस्थ मेला करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र होता है। पिछले आयोजनों में भीड़, अव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ी कई चुनौतियां सामने आई थीं।

इसी अनुभव से सीख लेते हुए इस बार प्रशासन ने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है। सिंहस्थ 2028 को देखते हुए शिप्रा नदी तटों को व्यवस्थित, सुरक्षित और आकर्षक बनाने की योजना बनाई गई है ताकि आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सके। इस परियोजना का उद्देश्य सिर्फ घाटों की मरम्मत नहीं, बल्कि पूरी नदी तट को एकीकृत और सुंदर धार्मिक कॉरिडोर के रूप में विकसित करना है।

क्या-क्या बदलेगा शिप्रा नदी किनारे?

शिप्रा रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट के तहत करीब 9 किलोमीटर लंबे पुराने घाटों का पुनर्विकास किया जाएगा। इसमें घाटों को पारंपरिक पत्थर शैली में मजबूत बनाया जाएगा ताकि उनकी ऐतिहासिक पहचान भी बनी रहे।

घाटों पर नई छतरियां, मंडप, शेड और बैठने की व्यवस्था बनाई जाएगी ताकि श्रद्धालु आराम से समय बिता सकें। इसके अलावा नदी किनारे हरियाली बढ़ाने के लिए ग्रीन बफर जोन और लैंडस्केपिंग की जाएगी।

सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह होगा कि बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए रैंप, रेलिंग और बैरियर-फ्री रास्ते बनाए जाएंगे, जिससे हर व्यक्ति आसानी से घाट तक पहुंच सके।

भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा होगी मजबूत

सिंहस्थ में करोड़ों लोगों की भीड़ एक साथ घाटों पर पहुंचती है। ऐसे में हादसों का खतरा भी बढ़ जाता है। इस बार परियोजना में भीड़ नियंत्रण को सबसे ज्यादा महत्व दिया गया है।

घाटों पर हाई-मास्ट लाइट लगाई जाएंगी, जिससे रात के समय भी पर्याप्त रोशनी रहेगी। इसके साथ सर्च लाइट, चेतावनी सायरन और सुरक्षा गार्ड रूम भी बनाए जाएंगे। पेयजल सुविधाएं, साफ रास्ते और बेहतर निकासी व्यवस्था भी तैयार की जाएगी ताकि लोगों को असुविधा न हो। इससे भगदड़ या दुर्घटनाओं का खतरा काफी हद तक कम हो सकेगा।

पर्यावरण और नदी की स्वच्छता पर भी फोकस

परियोजना का उद्देश्य सिर्फ सुंदरता बढ़ाना नहीं, बल्कि शिप्रा नदी के पर्यावरणीय संतुलन को भी सुधारना है। घाटों के विकास के साथ जल शुद्धीकरण और प्रदूषण नियंत्रण पर भी काम होगा। शिप्रा नदी को स्वच्छ बनाने के प्रयासों को पहले भी बढ़ावा मिला है और इसे स्वच्छ गंगा मिशन से भी जोड़ा गया है, जिससे नदी संरक्षण के प्रयासों को मजबूती मिली है। इस बार कोशिश है कि नदी में गंदगी और कचरा न पहुंचे और श्रद्धालुओं को साफ पानी और स्वच्छ वातावरण मिले।

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