मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन हमेशा से आस्था का बड़ा केंद्र रही है। लेकिन इस बार चर्चा का कारण सिर्फ महाशिवरात्रि नहीं, बल्कि एक ऐसी भव्य सजावट है, जिसे देखकर हर कोई चौंक रहा है। उज्जैन के पास बड़नगर में स्थित प्राचीन बुद्धेश्वर महादेव मंदिर में भगवान भोलेनाथ का श्रृंगार 1 करोड़ 31 लाख रुपए के असली नोटों से किया गया है।
जिधर नजर डालिए, उधर नोट ही नोट। मुकुट, हार, लड़ियां और पूरा दरबार करेंसी नोटों से सजा हुआ है। मंदिर में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है जैसे श्रद्धा और समर्पण ने धन का रूप ले लिया हो। यह सजावट सिर्फ दिखावा नहीं, बल्कि पिछले पांच वर्षों से चली आ रही एक खास परंपरा का हिस्सा है। इस साल रकम सबसे ज्यादा होने के कारण यह आयोजन और भी खास बन गया है।
बुद्धेश्वर महादेव मंदिर में नोटों की भव्य सजावट बनी आकर्षण का केंद्र
बड़नगर का बुद्धेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र का एक प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर है। हर साल महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां विशेष श्रृंगार किया जाता है, लेकिन इस बार 1.31 करोड़ रुपए के नोटों से सजी झांकी ने पूरे प्रदेश का ध्यान खींच लिया है।
मंदिर को असली करेंसी नोटों से सजाया गया है। इन नोटों से मुकुट बनाया गया, लंबी मालाएं तैयार की गईं और दीवारों पर सुंदर लहरदार डिजाइन बनाई गई। सात कुशल कलाकारों की टीम ने करीब 48 घंटे लगातार मेहनत कर इस अद्भुत सजावट को तैयार किया। बताया गया है कि पूरी तैयारी में लगभग तीन दिन का समय लगा।
श्रद्धालु जब इस झांकी को देखते हैं तो एक पल के लिए ठहर जाते हैं। कई लोग मोबाइल से तस्वीरें ले रहे हैं, तो कुछ भक्त भाव-विभोर होकर भोलेनाथ के दर्शन कर रहे हैं। मंदिर परिसर में सुरक्षा के भी खास इंतजाम किए गए हैं ताकि इतनी बड़ी रकम सुरक्षित रहे।
महाशिवरात्रि मेले में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
हर साल महाशिवरात्रि के बाद मंदिर में भव्य मेला लगता है। इस बार मेला 14 फरवरी से शुरू होकर 28 फरवरी तक चलेगा। 26 फरवरी तक नोटों से की गई यह खास सजावट दर्शन के लिए खुली रहेगी।
मेला शुरू होते ही आसपास के गांवों और शहरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बड़नगर पहुंच रहे हैं। कई परिवार बच्चों के साथ दर्शन करने आए हैं। स्थानीय दुकानदारों के चेहरे पर भी रौनक है। खिलौनों, प्रसाद, मिठाइयों और पूजा सामग्री की दुकानों पर भीड़ बढ़ गई है।
इस तरह 1.31 करोड़ के नोटों से सजे भोलेनाथ की झांकी ने न सिर्फ धार्मिक महत्व बढ़ाया है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति दी है। होटल, ढाबे और छोटी दुकानों में भी अच्छी आमदनी हो रही है।
1.31 करोड़ की सजावट
कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या यह केवल आकर्षण है या आस्था का प्रतीक? मंदिर प्रबंधन का कहना है कि यह परंपरा श्रद्धालुओं के सहयोग से निभाई जाती है। नोटों की यह सजावट अस्थायी होती है और तय समय के बाद रकम को सुरक्षित तरीके से वापस रखा जाता है। पिछले पांच वर्षों से यह परंपरा चल रही है, लेकिन हर साल रकम बढ़ती गई है। इस बार 1.31 करोड़ रुपए की राशि अब तक की सबसे बड़ी बताई जा रही है। यही कारण है कि उज्जैन और बड़नगर का यह मंदिर सोशल मीडिया पर भी चर्चा में है।
धार्मिक आयोजनों में भव्यता नई बात नहीं है। महाकालेश्वर मंदिर जैसे बड़े मंदिरों में भी विशेष अवसरों पर खास श्रृंगार होता है। लेकिन बुद्धेश्वर महादेव मंदिर की यह करेंसी सजावट अलग पहचान बना रही है। यह आयोजन बताता है कि लोगों की आस्था कितनी गहरी है। कई भक्त इसे अपने योगदान का प्रतीक मानते हैं। वहीं कुछ लोग इसे अनोखी परंपरा के रूप में देखते हैं, जो हर साल नए रिकॉर्ड बना रही है।
सुरक्षा और प्रबंधन की खास तैयारी
इतनी बड़ी रकम को मंदिर में सजाना आसान काम नहीं है। मंदिर प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। सीसीटीवी कैमरे, अतिरिक्त गार्ड और पुलिस की निगरानी रखी गई है।
कलाकारों ने नोटों को इस तरह सजाया कि वे सुरक्षित भी रहें और सुंदर भी दिखें। सजावट के दौरान हर नोट की गिनती और रिकॉर्ड रखा गया। आयोजन समाप्त होने के बाद पूरी रकम को व्यवस्थित रूप से सुरक्षित स्थान पर रखा जाएगा। इस तरह श्रद्धा और व्यवस्था दोनों का संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है।






