धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था के प्रमुख केंद्र उज्जैन में सावन के पवित्र महीने के चलते शिवालयों में भक्तों की भीड़ लगी हुई है। इसी दौरान हरियाली अमावस्या की रात उज्जैन के राम जनार्दन मंदिर परिसर में स्थित ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व वाले 38वें 84 महादेव कुसुमेश्वर महादेव मंदिर में एक हैरान करने वाली घटना सामने आई। यहां रात की नियमित आरती के बाद अचानक भगवान शिव के विग्रह के पास एक जहरीला कोबरा सांप रेंगता हुआ दिखाई दिया। इस अचानक हुए घटनाक्रम से मंदिर परिसर में कुछ देर के लिए चिंता और कौतूहल की स्थिति बन गई। इसके बाद मंदिर के मुख्य पुजारी गौरव विश्वनाथ मिश्रा ने तुरंत सोशल मीडिया के जरिए स्थानीय सर्प विशेषज्ञ को इसकी सूचना दी। इसके बाद सांप को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
यह पूरी घटना हरियाली अमावस्या की रात करीब साढ़े आठ बजे की है। मंदिर में रोज की तरह संध्या आरती का आयोजन किया गया था। आरती खत्म होने के बाद श्रद्धालु अपने घर लौट चुके थे। मंदिर के पुजारी पंडित गौरव विश्वनाथ मिश्रा गर्भगृह के पास बैठकर मोबाइल फोन पर कुछ जरूरी काम कर रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर हवन कुंड के पास पड़ी, जहां एक बड़ा कोबरा फन फैलाए बैठा था। इतने जहरीले सांप को अचानक पास देखकर पंडित जी घबरा गए। उन्होंने देखा कि उस समय मंदिर का मुख्य दरवाजा और अलमारियां खुली थीं। ऐसे में कोबरा मंदिर के अंदरूनी हिस्से या किसी अलमारी में छिप सकता था।
सर्पमित्र को दी गई सूचना
स्थिति को देखते हुए पंडित गौरव मिश्रा ने खुद कोई जोखिम नहीं लिया और विशेषज्ञ की मदद लेने का फैसला किया। उन्होंने तुरंत मोबाइल फोन पर इंस्टाग्राम के जरिए उज्जैन के सर्पमित्र राहुल का संपर्क नंबर खोजा। नंबर मिलने के बाद उन्होंने राहुल को फोन कर मंदिर में सांप होने की जानकारी दी और जल्द आने का अनुरोध किया। सूचना मिलते ही सर्पमित्र राहुल अपनी रेस्क्यू टीम के साथ कुसुमेश्वर महादेव मंदिर पहुंच गए। उन्होंने सावधानी से कोबरा को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित पकड़ लिया। इसके बाद कोबरा को मंदिर से दूर ले जाकर सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण यानी घने जंगल में छोड़ दिया गया।
मंदिर में पहली बार दिखा कोबरा
इस घटना को लेकर मंदिर के पुजारी पंडित गौरव ने बताया कि इस प्राचीन मंदिर परिसर में गर्भगृह या शिवलिंग के पास सांप दिखाई देने की यह पहली घटना है। हालांकि मंदिर के आसपास का क्षेत्र काफी हरा-भरा और प्राकृतिक है, जिसके कारण आसपास के जंगलों में अक्सर सांपों का आना-जाना लगा रहता है। लेकिन मंदिर के अंदर कोबरा का इस तरह पहुंचना दुर्लभ घटना है। राहत की बात यह रही कि जिस समय यह घटना हुई, उस समय मंदिर में श्रद्धालुओं की ज्यादा भीड़ नहीं थी। इससे किसी अप्रिय घटना की आशंका टल गई।
बारिश के कारण बिलों से निकल रहे सांप
वहीं, सांप का रेस्क्यू करने वाले सर्पमित्र राहुल ने बताया कि सावन के दौरान लगातार बारिश और मौसम में बदलाव के कारण जमीन के अंदर पानी भर जाता है। ऐसे में सांप अपने बिलों से बाहर निकलने लगते हैं। राहुल के अनुसार, इस साल सावन के दौरान अकेले उज्जैन जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से अब तक करीब 200 से ज्यादा सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है। इन सांपों को आबादी वाले इलाकों से दूर जंगलों में छोड़ा गया है।






