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उज्जैन-नागदा में बच्चों की तस्करी का शक, अंत्योदय एक्सप्रेस रोकी गई, जांच में चौंकाने वाली सच्चाई

Written by:Bhawna Choubey
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उज्जैन और नागदा स्टेशन पर बच्चों की तस्करी की आशंका से मचा हड़कंप, ट्रेन रोककर की गई जांच में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई, जानिए क्या सच में हो रही थी ट्रैफिकिंग या सिर्फ अफवाह थी।
उज्जैन-नागदा में बच्चों की तस्करी का शक, अंत्योदय एक्सप्रेस रोकी गई, जांच में चौंकाने वाली सच्चाई

अचानक एक खबर ने रेलवे प्रशासन और यात्रियों दोनों की धड़कनें बढ़ा दीं। कहा गया कि एक ट्रेन में बड़ी संख्या में बच्चों की तस्करी हो रही है। बस फिर क्या था, मामला गंभीर था और तुरंत कार्रवाई जरूरी थी।

जैसे ही सूचना मिली, उज्जैन रेलवे स्टेशन पर हलचल तेज हो गई। पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल और कई विभागों की टीमें एक साथ जुट गईं। कुछ ही देर में ट्रेन को रोककर जांच शुरू हुई। लेकिन जो सच्चाई सामने आई, उसने पूरे मामले की दिशा ही बदल दी।

उज्जैन स्टेशन पर रोकी गई ट्रेन, शुरू हुई सर्चिंग

बच्चों की तस्करी की आशंका के चलते ट्रेन संख्या 15559 दरभंगा-अहमदाबाद अंत्योदय एक्सप्रेस को उज्जैन स्टेशन पर रोका गया। यह सूचना रेल मदद एप के जरिए मिली थी, जिसमें दावा किया गया था कि ट्रेन के सामान्य डिब्बों में 100 से ज्यादा नाबालिग बच्चों की ट्रैफिकिंग हो रही है।

जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म नंबर पांच पर पहुंची, तुरंत जांच शुरू कर दी गई। इस दौरान आरपीएफ, जीआरपी, महिला एवं बाल विकास विभाग, श्रम विभाग और बाल कल्याण समिति की टीमों ने मिलकर हर कोच की बारीकी से जांच की।

हालांकि, शुरुआती जांच में शिकायत के मुताबिक कोई बड़ा मामला सामने नहीं आया। लेकिन चार बच्चों को संदिग्ध स्थिति में उतारा गया, जिससे मामला थोड़ा और गंभीर हो गया।

जांच में क्या निकला? चारों निकले बालिग

जिन चार बच्चों को उज्जैन स्टेशन पर उतारा गया था, उनकी जांच की गई। पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के बाद सामने आया कि सभी की उम्र 18 से 19 साल के बीच है।

यानी वे नाबालिग नहीं, बल्कि बालिग थे। उनके पास यात्रा के वैध टिकट भी मौजूद थे। इसके बाद उन्हें आगे की पूछताछ के लिए जीआरपी थाने भेजा गया। इस खुलासे के बाद यह साफ हो गया कि उज्जैन में बच्चों की तस्करी का मामला नहीं बनता, लेकिन अधिकारियों ने पूरी तरह से संतुष्ट होने के लिए जांच जारी रखने का फैसला किया।

नागदा स्टेशन पर फिर रोकी गई ट्रेन

उज्जैन से रवाना होने के बाद ट्रेन को नागदा स्टेशन पर भी रोका गया। यहां भी पुलिस और प्रशासन पहले से तैयार थे। नागदा में जांच के दौरान 24 बच्चों को ट्रेन से उतारा गया। यह संख्या देखते ही एक बार फिर मामला गंभीर नजर आने लगा। लेकिन जब जांच आगे बढ़ी, तो तस्वीर अलग निकली।

परिवार और सहमति के साथ यात्रा

नागदा में उतारे गए 24 बच्चों में से 14 बच्चे अपने परिवार के साथ यात्रा कर रहे थे। वहीं 10 बच्चे ऐसे थे, जो अकेले थे, लेकिन उन्होंने बताया कि वे अपने परिजनों की सहमति से यात्रा कर रहे हैं।

पूछताछ के दौरान किसी भी बच्चे ने जबरदस्ती या तस्करी जैसी बात नहीं कही। इससे यह साफ हो गया कि यह मामला भी बाल तस्करी का नहीं है। हालांकि, प्रशासन ने सावधानी बरतते हुए सभी बच्चों से विस्तार से पूछताछ की और उनके परिजनों से संपर्क कर पुष्टि की।

कैसे फैली बच्चों की तस्करी की आशंका?

इस पूरे मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई थी। रेल मदद एप पर एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी कि ट्रेन में बड़ी संख्या में बच्चों की तस्करी हो रही है। इसके अलावा कुछ गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) ने भी ऐसी ही आशंका जताई थी। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की। यह घटना बताती है कि आज के समय में सूचना कितनी तेजी से फैलती है और प्रशासन को हर सूचना पर तुरंत प्रतिक्रिया देनी पड़ती है।

आधे घंटे तक स्टेशन पर खड़ी रही ट्रेन

उज्जैन स्टेशन पर यह ट्रेन सामान्य समय से देरी से पहुंची थी। रात करीब 11 बजकर 9 मिनट पर ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आई और जांच के चलते लगभग आधे घंटे तक वहीं खड़ी रही।

जांच पूरी होने के बाद ट्रेन को रात 11 बजकर 42 मिनट पर रवाना किया गया। इस दौरान यात्रियों में काफी अफरा-तफरी का माहौल रहा। लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर हो क्या रहा है। कई यात्री डर गए थे, तो कुछ लोग इस पूरे घटनाक्रम को मोबाइल में रिकॉर्ड करते नजर आए।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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