उज्जैन के महाकाल मंदिर में मिलने वाला प्रसिद्ध लड्डू प्रसाद अब नई तकनीक के साथ तैयार होगा। दरअसल मंदिर समिति ने 40 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया है जिसके तहत अत्याधुनिक मशीनों से प्रसाद बनाया जाएगा। वहीं इस बदलाव का मकसद बढ़ती मांग को पूरा करना और हर बैच में एक जैसी गुणवत्ता बनाए रखना है। जानकारी दे दें कि मौजूदा समय में महाकाल मंदिर में लड्डू प्रसाद मैन्युअल तरीके से बनाया जाता है जहां करीब 65 कर्मचारी रोजाना काम करते हैं।
लेकिन श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के कारण यह व्यवस्था अब कम पड़ने लगी है। दरअसल मंदिर में हर दिन 40 से 50 क्विंटल प्रसाद बनता है जबकि वीकेंड और त्योहारों में मांग 100 क्विंटल तक पहुंच जाती है। इसी अंतर को खत्म करने के लिए मंदिर समिति ने हाईटेक यूनिट लगाने का फैसला लिया है। नई व्यवस्था से उत्पादन क्षमता दोगुनी होगी और समय भी बचेगा।
हाईटेक लड्डू यूनिट से बढ़ेगी उत्पादन क्षमता
दरअसल नई यूनिट शुरू होने के बाद रोजाना करीब 100 क्विंटल लड्डू प्रसाद तैयार किया जा सकेगा। मशीनों की मदद से बेसन को एक समान तरीके से भुना जाएगा जिससे स्वाद और रंग में एकरूपता बनी रहेगी। इसके अलावा घी, शक्कर और ड्रायफ्रूट का मिश्रण भी तय अनुपात में होगा, जिससे हर लड्डू का टेस्ट एक जैसा रहेगा। वहीं यह यूनिट त्रिवेणी संग्रहालय के सामने अन्नक्षेत्र परिसर में लगाई जाएगी जहां करीब 50 हजार वर्गफीट में आधुनिक भवन तैयार किया जा रहा है।
गड़बड़ी पर भारी जुर्माना
जानकारी के अनुसार इसमें बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर शामिल होंगे। इस प्रोजेक्ट को उज्जैन विकास प्राधिकरण तैयार कर रहा है। माना जा रहा है कि सिंहस्थ कुंभ से पहले यह यूनिट पूरी तरह चालू हो जाएगी, जिससे लाखों श्रद्धालुओं को बिना परेशानी प्रसाद मिल सकेगा। इसके साथ ही मंदिर समिति ने इस बार सिर्फ उत्पादन बढ़ाने पर नहीं बल्कि गुणवत्ता पर भी खास ध्यान दिया है। टेंडर में साफ शर्त रखी गई है कि केवल ब्रांडेड और शुद्ध सामग्री का ही इस्तेमाल होगा। अगर किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है तो वेंडर पर 50 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
नियमों के मुताबिक, घटिया कच्चे माल पर 5 लाख रुपए प्रति घटना, मिलावट मिलने पर 25 लाख रुपए और खराब प्रसाद मिलने पर 50 लाख रुपए तक की सजा तय की गई है। इसके अलावा स्वच्छता नियमों का पालन न करने या खाद्य मानकों का उल्लंघन करने पर भी भारी जुर्माना लगेगा। इसके साथ ही यह भी तय किया गया है कि वेंडर बाजार में प्रसाद नहीं बेच सकेगा, वह सिर्फ मंदिर समिति को ही सप्लाई करेगा। इससे प्रसाद की विश्वसनीयता बनी रहेगी।






