उज्जैन जिले में मानसून की अच्छी शुरुआत के बाद अब बारिश का लंबा ब्रेक किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। लगभग 15 दिनों से जिले में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है, जिससे एक महीने पहले बोई गई सोयाबीन की फसल पर असर साफ दिखाई देने लगा है।
किसानों का कहना है कि इस बार उन्होंने महंगे दाम पर बीज खरीदे, खाद और कीटनाशकों पर भी अच्छा-खासा खर्च किया। शुरुआत में हुई बारिश से फसल ने अच्छी बढ़त ली थी, लेकिन अब लगातार सूखे जैसे हालात बनने से पूरी मेहनत पर संकट मंडराने लगा है।
बारिश नहीं होने से सोयाबीन की फसल पर बढ़ा खतरा
उज्जैन और आसपास के ग्रामीण इलाकों में सोयाबीन खरीफ सीजन की सबसे प्रमुख फसल मानी जाती है। समय पर बारिश मिलने पर इसकी पैदावार बेहतर होती है, लेकिन लंबे समय तक बारिश नहीं होने पर पौधों की जड़ें कमजोर होने लगती हैं।
कई गांवों में किसान बता रहे हैं कि फसल का रंग बदलने लगा है और कुछ खेतों में पौधे मुरझाने के संकेत भी दिखाई दे रहे हैं। ऐसे हालात में किसान सिंचाई की व्यवस्था भी नहीं कर पा रहे, क्योंकि अधिकांश खेती बारिश पर ही निर्भर है।
जुलाई के आखिर में लौट सकती है बारिश
शासकीय जीवाजी वेधशाला उज्जैन के अधीक्षक राजेंद्र प्रसाद गुप्त के अनुसार, इस वर्ष मानसून की शुरुआत अच्छी रही और जून-जुलाई के दौरान जिले में अब तक 426.6 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की जा चुकी है। हालांकि पिछले 7 से 10 दिनों में बारिश की गतिविधियां काफी कमजोर रही हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने से मौसम में बदलाव शुरू हो गया है और इसका असर पश्चिम मध्य प्रदेश पर भी देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई के अंतिम दिनों में उज्जैन सहित आसपास के जिलों में अच्छी बारिश की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग ने भी इस साल देश में सामान्य मानसून का अनुमान जताया है। हालांकि अगस्त में अल नीनो की स्थिति बदलने पर बारिश की रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है। ऐसे में किसानों के लिए जुलाई के आखिर की बारिश बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।






