उज्जैन जिले के बड़नगर क्षेत्र में गुरुवार रात एक तीन साल का बच्चा 75 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया। दरअसल यह दर्दनाक हादसा तब हुआ जब बच्चा अपनी मां के सामने खेलते-खेलते खुले बोरवेल में जा गिरा। वहीं घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही बचाव दल मौके पर पहुंचा और बच्चे को सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया है।
जानकारी के अनुसार बोरवेल में गिरे बच्चे का नाम भागीरथ है और उसकी उम्र करीब तीन साल है। वह प्रवीण देवासी का बेटा है और मूल रूप से राजस्थान के पाली जिले के गुड़ानला गांव का रहने वाला है। परिवार भेड़ चराने का काम करता है और इसी कारण पिछले तीन दिनों से उज्जैन से करीब 75 किलोमीटर दूर बड़नगर के पास झालरिया गांव में रुका हुआ था।
बच्चे के हाथ में पहनाई गई एक रिंग
भागीरथ को बोरवेल से निकलने के लिए रेस्क्यू टीम अंडरवाटर कैमरा ऑक्सीजन किट और इंप्रोवाइज्ड वॉइस किट का इस्तेमाल कर रही है। ताजा जानकारी के मुताबिक विभाग से पाइप और रॉड मंगवाने के बाद बचाव अभियान शुरू कर दिया गया है। बच्चे के एक हाथ में रिंग पहना दी गई है। दूसरे हाथ में रिंग पहनाने की कोशिश की जा रही है।
चल रहा है रेस्क्यू ऑपरेशन
बच्चों की लोकेशन 75 फीट की गहराई पर मिली है और रेस्क्यू टीम लगातार ऑपरेशन में लगी हुई है। SDRF के कमांडेंट संतोष जाट के मुताबिक यह कोशिश की जा रही है कि बच्चों के हाथों में रिस्क रोक की रिंग पहना कर उसे बाहर निकाल लिया जाए। पोकलेन की मदद से एक समांतर सुरंग भी बनाई जा रही है। 40 मिनट तक की खुदाई हो गई है लेकिन चट्टानें आने की वजह से काम रुक गया है। चट्टाने तोड़ने के लिए हैमर मशीन बुलाई गई है। यह बोरवेल 200 फीट गहरा है और इसमें पानी भी है। बच्चे को निकालने के लिए हरदा, इंदौर और उज्जैन की SDRF टीम के साथ भोपाल की NDRF टीम ज्वाइंट ऑपरेशन में जुटी हुई है। बच्चों को ऑक्सीजन सपोर्ट दिया जा रहा है और मौके पर दो एंबुलेंस भी तैनात है।
कैसे घटी यह घटना?
बताया जा रहा है कि बच्चा पलदूना रोड के पास खेल रहा था। इसी दौरान वह एक खुले और बिना ढक्कन वाले बोरवेल के पास पहुंच गया और अचानक उसमें गिर गया। यह पूरी घटना उसकी मां के सामने हुई। बच्चे को गिरते देख मां घबरा गईं और चीखने लगीं। उनकी आवाज सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस व प्रशासन को सूचना दी।
सूचना मिलते ही पुलिस, बचाव दल और अन्य अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गए। बच्चे की सही स्थिति का पता लगाने के लिए बोरवेल में कैमरा डाला गया है। कैमरे के माध्यम से बच्चे की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। बच्चे तक ऑक्सीजन पहुंचाने की भी व्यवस्था की गई है ताकि उसे सांस लेने में परेशानी न हो।
स्थानीय ग्रामीण भी कर रहे मदद
बचाव दल माइक्रोफोन के जरिए बच्चे से बात करने की भी कोशिश कर रहा है ताकि वह घबराए नहीं। मौके पर मौजूद अधिकारी पूरे बचाव अभियान की निगरानी कर रहे हैं। स्थानीय ग्रामीण भी बचाव दल की मदद में लगे हुए हैं और आवश्यक व्यवस्था में सहयोग कर रहे हैं। प्रशासन ने बच्चे को सुरक्षित निकालने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाने की तैयारी की है। जरूरत पड़ने पर बोरवेल के समानांतर गड्ढा खोदकर सुरंग बनाकर बच्चे तक पहुंचने की योजना पर भी काम किया जा सकता है। हालांकि यह प्रक्रिया सावधानी से की जाती है क्योंकि इसमें मिट्टी धंसने का खतरा रहता है।
घटना के बाद पूरे इलाके में चिंता का माहौल है। बच्चे के परिवार के लोग घटनास्थल पर मौजूद हैं और उसकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। प्रशासन का कहना है कि जब तक बच्चा सुरक्षित बाहर नहीं आ जाता, तब तक बचाव अभियान लगातार जारी रहेगा। यह घटना एक बार फिर खुले बोरवेलों के खतरे की ओर ध्यान दिलाती है, जिनके कारण इस तरह के हादसे सामने आते हैं।






