मध्य प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में गुरुवार से पालतू हाथियों के लिए 4 दिनों का विशेष पिकनिक उत्सव शुरू हो गया है। इस दौरान हाथियों को हर तरह की ड्यूटी से पूरी तरह छुट्टी दे दी गई है। धमोखर बफर के जंगलों में चल रहे इस आयोजन में हाथियों के आराम, सेहत और उनकी खास पसंद का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। वन विभाग के कर्मचारी दिन-रात इनकी सेवा में जुटे हैं।

मलमल कर स्नान और अरंडी के तेल से मालिश

पिकनिक के दौरान हाथियों की खातिरदारी में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। वनकर्मी हाथियों को नदी और ताल-तलैयों में अच्छी तरह रगड़-रगड़कर नहला रहे हैं। नहाने के बाद उनके शरीर पर अरंडी के तेल से मालिश की जा रही है और माथे पर चंदन लगाकर उनका आदर-सत्कार किया जा रहा है। रोजाना गश्त करने वाले इन गजराजों के लिए यह समय थकान मिटाने और आराम फरमाने का है।

गन्ना, गुड़ और सेब से हो रही खास खातिरदारी

हाथियों के खान-पान का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। उनकी डाइट में पसंदीदा व्यंजन शामिल किए गए हैं। हाथियों को भरपेट गन्ना, गुड़, सेब और ताजा नारियल खिलाया जा रहा है। आमतौर पर जंगल की कठिन पगडंडियों पर चलने वाले इन हाथियों के लिए स्वादिष्ट पकवानों का स्वाद लेना और बेफिक्र होकर घूमना एक अलग ही अहसास है। वन कर्मचारी भी उनके साथ वक्त बिताकर काफी खुश नजर आ रहे हैं।

 

उम्रदराज ‘गौतम’ और ‘अनारकली’ बने केंद्र

इस पिकनिक में बांधवगढ़ के सबसे बुजुर्ग हाथी गौतम और हथिनी अनारकली आकर्षण का मुख्य केंद्र बने हुए हैं। गौतम का जन्म 1946 और अनारकली का जन्म 1964 का बताया जाता है। इनके साथ बांधवी, कृष्णगज, पूनम और बरखा जैसे अन्य साथी भी पिकनिक का भरपूर आनंद ले रहे हैं। उम्रदराज हाथियों की देखभाल के लिए डॉक्टरों की स्पेशल टीम भी लगातार निगरानी कर रही है।

गश्त से मिला ब्रेक, सुरक्षा में निभाते हैं बड़ी भूमिका

आम दिनों में ये सभी पालतू हाथी वन विभाग की टीम के साथ घने जंगलों में गश्त करने, शिकारियों पर नजर रखने और वन्यजीवों के रेस्क्यू ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाते हैं। कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले इन बेजुबानों की मेहनत को देखते हुए ही वन विभाग हर साल इस पिकनिक का आयोजन करता है, ताकि वे तरोताजा होकर दोबारा जंगल की रखवाली का जिम्मा संभाल सकें।