उमरिया जिले के गिठोरी गांव से पहुंचे आदिवासी ग्रामीणों ने मंगलवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर अपनी मांगों को लेकर जमकर प्रदर्शन किया। ग्रामीण बजरंग पावर इस्पात लिमिटेड के अधिकारियों के खिलाफ कथित अभद्रता और अन्य आरोपों को लेकर FIR दर्ज करने की मांग कर रहे थे। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाते रहेंगे।

मंगलवार को जनसुनवाई का दिन होने के कारण बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी शिकायत लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे थे। गिठोरी गांव के आदिवासी ग्रामीण भी अपनी मांगों और शिकायतों के निराकरण की उम्मीद लेकर एसपी कार्यालय पहुंचे। हालांकि, कार्यालय के बाहर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर दी। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई और उन्होंने बैरिकेडिंग के सामने ही प्रदर्शन शुरू कर दिया।

ग्रामीण करीब दो से ढाई घंटे तक पुलिस के सामने आंदोलन करते रहे। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने बजरंग पावर इस्पात लिमिटेड के अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग उठाई। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी के अधिकारी कोल आवंटन से संबंधित मामले को लेकर गांव पहुंचे थे। इसी दौरान कथित तौर पर आदिवासी महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया।

पीड़ित ग्रामीणों की एफआईआर दर्ज नहीं करने का आरोप  

ग्रामीणों का कहना है कि मामले में शिकायत के बावजूद अभी तक उनकी मांग के अनुसार FIR दर्ज नहीं की गई है। इसी को लेकर वे पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।

एसपी ने ग्रामीणों से बात कर निष्पक्ष जाँच का भरोसा दिया

एडिशनल एसपी ने ग्रामीणों को समझाइश देने की कोशिश की लेकिन ग्रामीण एसपी को बहार बुलाकर उनकी बात सुनने की जिद पर  अड़ गए, एसपी विजय भगवानी ने ग्रामीणों को भरोसा दिया कि यदि कंपनी के अधिकारियों की गलती है तो उन्हें इसका दंड मिलेगा , एसपी ने ये भी आश्वासन दिया कि यदि की बेकसूर का नाम एफआईआर में  है और वो जाँच में सामने आता है तो उसे डरने की जरुरत नहीं है , किसी भी बेकसूर पर कोई कार्रवाई नहीं होगी

ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी 

लगातार दो से ढाई घंटे तक चले प्रदर्शन के कारण पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। पुलिस ने बैरिकेडिंग के जरिए प्रदर्शनकारियों को कार्यालय परिसर में प्रवेश करने से रोका। ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते रहे।  ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी शिकायत पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगे भी आंदोलन कर सकते हैं।

ब्रजेश श्रीवास्तव की रिपोर्ट