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आजादी के बाद से अब तक सड़क, पुल और पेयजल का इंतजार, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, निकाली जन आक्रोश यात्रा

Reported by:Brijesh Shrivastav|Edited by:Atul Saxena
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बरसात के मौसम में संपर्क मार्ग कट जाने से बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पाते और किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में परेशानी होती है।

उमरिया जिले के चंदिया क्षेत्र में आजादी के सात दशक बाद भी सड़क, पुल और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित ग्रामीणों का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया। क्षेत्र की वर्षों पुरानी समस्याओं को लेकर आज ग्रामीणों ने जन आक्रोश यात्रा निकाली, इस दौरान करीब 30 किलोमीटर दूर-दराज के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण उमरिया पहुंचे और अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।

यात्रा के दौरान ग्रामीणों में भारी आक्रोश दोनों देखने को मिला। उनका कहना था कि विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन आज भी क्षेत्र के कई गांव ऐसे हैं जहां बरसात के दिनों में सड़कें दलदल में तब्दील हो जाती हैं। पुल-पुलियों के अभाव में लोगों का आवागमन बाधित हो जाता है और कई बार मरीजों को समय पर अस्पताल तक पहुंचाना भी मुश्किल हो जाता है। वहीं पेयजल संकट ने ग्रामीणों का जीवन और अधिक कठिन बना दिया है।

चंदिया क्षेत्र के लोगों ने वर्षों तक अपनी समस्याओं को शांतिपूर्वक शासन-प्रशासन के सामने रखा, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण ग्रामीणों ने लोकतांत्रिक तरीके से जन आक्रोश यात्रा निकालकर अपनी आवाज जिला मुख्यालय तक पहुंचाने का निर्णय लिया। यह यात्रा केवल विरोध नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास की मांग का प्रतीक है।

सड़क, पुल पुलिया नहीं, आजादी के बाद से बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान ग्रामीण  

जिला मुख्यालय पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने नारेबाजी करते हुए अपनी समस्याओं की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद ग्रामीणों ने अधिकारियों को पांच सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में प्रमुख रूप से सड़क निर्माण, पुल-पुलियों का निर्माण, शुद्ध पेयजल व्यवस्था, क्षेत्रीय विकास कार्यों में तेजी और जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण की मांग शामिल रही। एसडीएम एन कहा जो समस्या बताई की गई हैं उससे संबंधित विभागों से समन्वय कर उसे दूर किया जायेगा और जो मांगे शासन स्तर की हैं उन्हें वहां भेजा जायेगा।

कई किलोमीटर दूर से लाना पड़ता है पानी, बारिश में बच्चे स्कूल नहीं जा पाते  

ग्रामीणों ने बताया कि कई गांवों में आज भी लोगों को पीने के पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। बरसात के मौसम में संपर्क मार्ग कट जाने से बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पाते और किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में परेशानी होती है। इन समस्याओं का असर सीधे ग्रामीणों के जीवन स्तर और आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है।

ग्रामीणों की चेतावनी, अब भी हालात नहीं सुधरे तो होगा बड़ा आंदोलन 

ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर विकास कार्य देखना चाहती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि शासन और प्रशासन जनभावनाओं को समझते हुए मांगों पर सकारात्मक पहल करता है, तो क्षेत्र की जनता उनका स्वागत करने के लिए भी तैयार है। संघर्ष का उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि विकास और जनहित है।

जन आक्रोश यात्रा के साथ ही चंदिया क्षेत्र की बुनियादी समस्याएं एक बार फिर जिले की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन ग्रामीणों की मांगों पर कितना गंभीरता से कदम उठाता है और वर्षों से चली आ रही समस्याओं के समाधान की दिशा में क्या पहल करता है।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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