इंदौर में मिलावट कार्रवाई के तहत खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने शहर में बड़ा अभियान चलाते हुए दो प्रतिष्ठानों से करीब 12 लाख रुपये कीमत का संदिग्ध घी जब्त किया है। दरअसल जांच के दौरान 31 खाद्य नमूने भी लिए गए हैं, जिन्हें भोपाल की प्रयोगशाला भेजा गया है। वहीं रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने शहर के चार अलग-अलग प्रतिष्ठानों पर बिना पूर्व सूचना के निरीक्षण किया। जांच का मुख्य उद्देश्य दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता की पड़ताल करना था, क्योंकि त्योहारों और बढ़ती मांग के दौरान मिलावट की आशंका अधिक रहती है। अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान कुल 31 खाद्य नमूने एकत्र किए, जिनमें घी सहित अन्य खाद्य सामग्री भी शामिल है। टीम ने सिर्फ सैंपल ही नहीं लिए, बल्कि भंडारण व्यवस्था, साफ-सफाई, लाइसेंस और खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन की भी जांच की। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा ताकि बाजार में मिलावटी खाद्य सामग्री की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

संदिग्ध घी जब्त, लैब रिपोर्ट के बाद होगी कानूनी कार्रवाई
वहीं कार्रवाई के दौरान दो प्रतिष्ठानों से 2,165 किलोग्राम से अधिक संदिग्ध घी जब्त किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 12 लाख रुपये बताई गई है। प्रारंभिक जांच में अधिकारियों को घी की गुणवत्ता पर संदेह हुआ, जिसके बाद उसे तत्काल जब्त कर सुरक्षित रख दिया गया। अब सभी नमूनों को राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, भोपाल भेजा गया है, जहां वैज्ञानिक जांच के बाद यह तय होगा कि उत्पाद तय मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं। यदि रिपोर्ट में मिलावट या गुणवत्ता संबंधी गड़बड़ी सामने आती है, तो संबंधित कारोबारियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसमें भारी जुर्माना, लाइसेंस निलंबन या रद्द करना और जरूरत पड़ने पर कानूनी मामला दर्ज करना भी शामिल हो सकता है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी।
मिलावट से बचने के लिए उपभोक्ता क्या रखें ध्यान?
विशेषज्ञों का मानना है कि मिलावटी घी और दुग्ध उत्पाद स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। ऐसे उत्पादों के लगातार सेवन से पाचन संबंधी दिक्कतें, लिवर पर असर और लंबे समय में अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए उपभोक्ताओं को हमेशा भरोसेमंद दुकानों से ही खाद्य सामग्री खरीदनी चाहिए और पैक्ड उत्पाद लेते समय निर्माण तिथि, एक्सपायरी डेट, बैच नंबर तथा लाइसेंस संबंधी जानकारी जरूर जांचनी चाहिए। यदि किसी उत्पाद के स्वाद, रंग या गंध पर संदेह हो तो उसकी शिकायत संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग को की जा सकती है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने भी साफ कहा है कि आम लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने विशेष रूप से बाहरी राज्यों से आने वाले दुग्ध उत्पादों और बिना वैध अनुमति संचालित खाद्य कारोबारों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में भी ऐसे विशेष अभियान जारी रहेंगे, ताकि मिलावट करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो और उपभोक्ताओं का भरोसा बना रहे।






