समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल में हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल को लेकर भाजपा पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि विधानसभा चुनावों से ठीक पहले चुनाव आयोग द्वारा 83 ब्लॉक डेवलपमेंट अधिकारियों (BDO), असिस्टेंट रेवेन्यू अधिकारियों (ARO) और 173 पुलिस अधिकारियों का बड़े पैमाने पर तबादला ‘चुनावी हेराफेरी’ है। यादव का यह बयान चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल के 18 जिलों में किए गए इन बड़े तबादलों के ठीक बाद आया है, जिसने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
अखिलेश यादव ने भाजपा पर तंज कसते हुए दावा किया कि पार्टी बंगाल में बुरी तरह हार रही है और दीदी (ममता बनर्जी) वहां हैं, और दीदी ही रहेंगी। समाजवादी पार्टी प्रमुख ने जोर देकर कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की स्थिति दिन-ब-दिन बद से बदतर होती जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है कि भाजपा अपनी संभावित हार को देखते हुए ‘सम्मानजनक हार’ के लिए अपनी व्यवस्था कर रही है। यह इस चुनाव की एक विशिष्टता है, जो भाजपा की अंदरूनी घबराहट और आत्मविश्वास की कमी को दर्शाती है। यादव के मुताबिक, भाजपा को अब यह बात समझ आ गई है कि वह तृणमूल कांग्रेस के गढ़ को भेद नहीं पाएगी, और इसलिए अब वह नतीजों को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए परदे के पीछे से काम कर रही है।
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“भाजपा बंगाल बुरी तरह हार रही है। वहां दीदी हैं, दीदी रहेंगी।” (अखिलेश यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी)
अखिलेश यादव ने अधिकारियों के तबादलों पर उठाए सवाल
यादव ने तबादलों की इस बड़ी संख्या पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये सामान्य प्रशासनिक तबादले नहीं, बल्कि सीधे तौर पर ‘चुनावी हेराफेरी’ हैं। उनका मानना है कि भाजपा जिस बड़ी संख्या में बंगाल में पुलिस अधिकारियों और बीडीओ को बदल रही है, उससे यह बात साफ साबित होती है कि बंगाल में भाजपा का मुंह मीठा नहीं होगा। यह एक स्पष्ट संकेत है कि भाजपा अपनी हार मान चुकी है और अब वह चुनावी मशीनरी को अपने हिसाब से मोड़ने की कोशिश कर रही है। अखिलेश यादव ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर अधिकारियों का बदलना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हो सकता, यह सीधे तौर पर चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश है, जिसे जनता देख रही है और समझ रही है।
चुनाव आयोग का बड़ा फेरबदल और उसका राजनीतिक निहितार्थ
दरअसल, चुनाव आयोग ने रविवार को पश्चिम बंगाल के 18 जिलों में एक साथ 83 बीडीओ और एआरओ का तबादला कर दिया। ये तबादले विधानसभा चुनावों के दौरान निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किए गए बताए जा रहे हैं। चुनाव आयोग के पास चुनावों के दौरान अधिकारियों के तबादले करने का अधिकार होता है, ताकि स्थानीय स्तर पर किसी भी राजनीतिक दल के प्रभाव को कम किया जा सके और स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव कराए जा सकें। हालांकि, अखिलेश यादव जैसे नेताओं के लिए, ये तबादले भाजपा के दबाव में या उसके हित में किए गए प्रतीत होते हैं। बीडीओ और एआरओ जैसे अधिकारी स्थानीय स्तर पर चुनाव प्रबंधन, मतदाता सूचियों के रखरखाव और मतदान केंद्रों की व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनका स्थानांतरण चुनावी प्रक्रिया पर सीधा असर डाल सकता है।
इस बड़े फेरबदल में कूच बिहार के दिनहाटा-दो से लेकर दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर-एक और डायमंड हार्बर-दो तक के ब्लॉक शामिल हैं। इसके अलावा, रामनगर, नंदीग्राम-एक और दो, नानूर, लाभपुर, सूरी-एक, मोहम्मद बाजार, इलंबजार और मयूरेश्वर-एक जैसे महत्वपूर्ण ब्लॉक भी इस फेरबदल से प्रभावित हुए हैं। नंदीग्राम, विशेष रूप से, एक हाई-प्रोफाइल सीट है जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद चुनाव लड़ रही हैं, और वहां के अधिकारियों का तबादला राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील माना जा रहा है। इन तबादलों से स्थानीय प्रशासन में एक नया समीकरण बनता है, जिसका चुनाव नतीजों पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।
चुनाव आयोग ने बड़े पैमाने पर किए पुलिस अधिकारियों के तबादले
चुनाव आयोग ने सिर्फ बीडीओ और एआरओ तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि 173 पुलिस स्टेशनों के इंचार्ज अधिकारियों और इंस्पेक्टरों का भी व्यापक स्तर पर तबादला कर दिया है। इसमें कोलकाता पुलिस के तहत आने वाले 31 पुलिस स्टेशन भी शामिल हैं, जो राज्य की राजधानी में कानून व्यवस्था और चुनावी प्रक्रियाओं पर संभावित प्रभाव के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। पुलिस अधिकारी चुनावों के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने, आदर्श आचार संहिता का पालन कराने और किसी भी प्रकार की हिंसा या धांधली को रोकने में अहम भूमिका निभाते हैं। इतने बड़े पैमाने पर पुलिस अधिकारियों का तबादला अक्सर यह संकेत देता है कि चुनाव आयोग किसी भी तरह के स्थानीय प्रभाव को खत्म करना चाहता है, लेकिन विपक्षी दल इसे सत्ताधारी दल के लिए रास्ता साफ करने की कोशिश के तौर पर देखते हैं।
इन तबादलों से पश्चिम बंगाल के लगभग सभी प्रमुख क्षेत्र प्रभावित हुए हैं। जिन 18 जिलों में ये तबादले हुए हैं, उनकी सूची में कूच बिहार, जलपाईगुड़ी, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, हावड़ा, हुगली, पूर्वी मेदिनीपुर, पश्चिमी मेदिनीपुर, पुरुलिया, बांकुरा, पूर्वी बर्धवान, पश्चिमी बर्धवान और बीरभूम शामिल हैं। यह सूची बताती है कि चुनाव आयोग ने राज्यभर में एक समान रूप से प्रशासनिक फेरबदल किया है, जिसका असर हर विधानसभा क्षेत्र पर पड़ने की संभावना है। इन जिलों में स्थानीय प्रशासन में अचानक हुए बदलाव से चुनाव प्रबंधन में अस्थिरता आ सकती है, जिसे अखिलेश यादव जैसे नेता भाजपा के लिए फायदा पहुंचाने वाला कदम मान रहे हैं।
भाजपा का ‘200 पार’ का नारा, विपक्ष ने लगाए धांधली के आरोप
अखिलेश यादव के इस बयान ने पश्चिम बंगाल के चुनावी माहौल को और गरमा दिया है। एक तरफ जहां भाजपा लगातार राज्य में सत्ता में आने का दावा कर रही है और ‘अबकी बार 200 पार’ का नारा दे रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल, जिसमें अब समाजवादी पार्टी भी शामिल हो गई है, भाजपा पर चुनावी धांधली और प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग करने का आरोप लगा रहे हैं। यह आरोप-प्रत्यारोप का दौर चुनावों तक जारी रहने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन तबादलों का चुनाव परिणाम पर क्या असर पड़ता है और भाजपा इन आरोपों का क्या जवाब देती है। हालांकि, अखिलेश यादव का दृढ़ विश्वास है कि ‘दीदी हैं, दीदी रहेंगी’ और बंगाल में भाजपा को निराशा ही हाथ लगेगी, जो उसकी ‘सम्मानजनक हार’ की व्यवस्था को ही साबित करेगा।