समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जयपुर से दावा किया है कि इस बार पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) गठबंधन उत्तर प्रदेश की सत्ता की चाबी अपने हाथ में रखेगा। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह सामाजिक समीकरण भाजपा को सत्ता से बाहर करने में पूरी तरह सक्षम है। यादव ने जोर देकर कहा कि प्रदेश में इंडिया गठबंधन मजबूत है और वह भाजपा पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए अपनी बात रख रहे थे। उनका यह बयान आगामी चुनावों के मद्देनजर समाजवादी पार्टी की रणनीति और आत्मविश्वास को दर्शाता है।
अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि पीडीए गठबंधन सिर्फ एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि समाज के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व है, जिसके साथ आने पर सत्ता परिवर्तन निश्चित है। उन्होंने इस गठबंधन को निर्णायक भूमिका निभाने वाला बताया, जो उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया अध्याय लिखेगा। उनका कहना था कि जब ये वर्ग एक साथ आएंगे तो भाजपा की चुनावी रणनीति धरी की धरी रह जाएगी और जनता अपने मताधिकार का सही प्रयोग करके बदलाव लाएगी।
मतदाता सूची संशोधन पर अखिलेश ने उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया (एसआईआर) को लेकर भाजपा और चुनाव प्रक्रिया पर तीखे सवाल उठाए। उनका सीधा आरोप था कि शुद्धीकरण के नाम पर उनके समर्थकों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सीधे तौर पर मताधिकार के साथ खिलवाड़ है, जो लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष ने दावा किया कि भाजपा सुनियोजित तरीके से यह काम करवा रही है ताकि उसके पक्ष में चुनावी माहौल बनाया जा सके और विरोधियों को कमजोर किया जा सके।
यादव ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी उंगली उठाई। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर इसी तरह वोट काटे जाते रहे और आम जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन होता रहा, तो मतदाता ही सरकार का शुद्धीकरण कर देंगे। यह टिप्पणी सीधे तौर पर भाजपा सरकार और चुनाव आयोग दोनों पर थी, जिसमें अखिलेश ने आगामी चुनावों में जनता के गुस्से की चेतावनी दी। उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करे और मतदाता सूचियों को त्रुटिहीन और निष्पक्ष बनाए ताकि हर नागरिक को मतदान का अधिकार मिल सके।
भारतीय समाज की मिली-जुली संस्कृति को देश की असली पहचान बताते हुए अखिलेश यादव ने इतिहास से सकारात्मक सीख लेने की बात कही। उन्होंने जोर दिया कि सामंजस्य और सौहार्द के बिना समाज में अमन-चैन संभव नहीं है। उनका यह बयान देश में चल रही विभिन्न सामाजिक और धार्मिक बहसों के बीच आया, जहां वे सहिष्णुता और भाईचारे की वकालत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता ही उसकी ताकत है और इसे कमजोर करने की किसी भी कोशिश का समाजवादी पार्टी विरोध करती है।
समाजवादी पार्टी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का सम्मान करती है- अखिलेश यादव
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद पर अखिलेश यादव ने उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य नकली संतों के खिलाफ लड़ रहे हैं और समाजवादी पार्टी उनका सम्मान करती है। अखिलेश का यह बयान धार्मिक मुद्दों पर समाजवादी पार्टी के रुख को स्पष्ट करता है कि वे धर्म के नाम पर पाखंड और आडंबर के खिलाफ हैं और सच्चे धार्मिक नेताओं का सम्मान करते हैं। यह एक तरह से धार्मिक और सामाजिक ध्रुवीकरण की राजनीति के बीच एक संतुलन साधने की कोशिश भी थी।
काशी के विकास कार्यों और भाजपा नीतियों पर तीखे कटाक्ष
राष्ट्रीय राजनीति पर बोलते हुए अखिलेश यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री बनाने की चर्चाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने वाराणसी के मणिकर्णिका घाट और काशी के विकास कार्यों पर सवाल उठाते हुए भाजपा सरकार को घेरा। यादव ने याद दिलाया कि वाराणसी को क्योटो बनाने का वादा किया गया था, लेकिन वह हवा हो गया। उनका आरोप था कि काशी के विकास के नाम पर सिर्फ दिखावा हुआ है और जमीनी हकीकत कुछ और है।
उन्होंने काशी में मेट्रो परियोजना के ठप होने और अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा को कथित तौर पर नुकसान पहुंचाने का आरोप भी लगाया। अखिलेश ने कहा कि भाजपा केवल बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन धरातल पर विकास के नाम पर कुछ नहीं होता। उन्होंने फिल्म ‘धुरंधर’ और नोटबंदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा काल्पनिक बातों को हकीकत की तरह पेश करने में माहिर है। उनका इशारा था कि सरकार जनता को बड़े-बड़े सपने दिखाती है, लेकिन उन्हें पूरा करने में विफल रहती है।
अखिलेश यादव ने व्यंग्य करते हुए यह भी जोड़ा कि उत्तर प्रदेश में रोज गांजा पकड़ा जाता है, लेकिन यह गांजा कहां जाता है, यह रहस्य बना हुआ है। उन्होंने कहा कि शायद भविष्य में इस पर कोई ओटीटी सीरीज भी आ जाए। यह टिप्पणी प्रदेश में कानून-व्यवस्था और अवैध गतिविधियों पर सरकारी नियंत्रण को लेकर सीधे तौर पर सवाल उठाती है। अखिलेश ने अपने इस बयान के जरिए सरकार पर तस्करों और अवैध कारोबारियों से मिलीभगत का आरोप भी जड़ा, जिसमें उन्होंने पारदर्शिता की कमी पर जोर दिया। कुल मिलाकर, अखिलेश यादव का जयपुर दौरा भाजपा सरकार और उसकी नीतियों पर एक सीधा हमला था, जिसमें उन्होंने आगामी चुनावों के लिए अपनी पार्टी की दिशा स्पष्ट की।





