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अब ‘रविंद्र नगर’ के नाम से जाना जाएगा लखीमपुर खीरी का मियांपुर, सीएम योगी का बड़ा ऐलान, बोले- पहचान छिपाने के लिए हुआ था नामकरण

Written by:Ankita Chourdia
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लखीमपुर खीरी जिले के मियांपुर गांव का नाम बदलकर रविंद्र नगर करने का ऐलान किया। सीएम योगी ने कहा कि विभाजन के समय बसे हिंदुओं की पहचान छुपाने के लिए इस गांव का नाम मियांपुर किया गया था। अब इस बस्ती को राष्ट्रगान के रचयिता रविंद्रनाथ टैगोर के नाम से जाना जाएगा।
अब ‘रविंद्र नगर’ के नाम से जाना जाएगा लखीमपुर खीरी का मियांपुर, सीएम योगी का बड़ा ऐलान, बोले- पहचान छिपाने के लिए हुआ था नामकरण

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लखीमपुर खीरी जिले के मोहम्मदी तहसील क्षेत्र में स्थित मियांपुर गांव का नाम बदलने का ऐतिहासिक ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अब यह बस्ती ‘रविंद्र नगर’ के नाम से जानी जाएगी। सीएम योगी ने मियांपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यह महत्वपूर्ण फैसला सार्वजनिक किया, जो उनकी सरकार द्वारा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को पुनर्जीवित करने के प्रयासों का एक हिस्सा माना जा रहा है। इस निर्णय से क्षेत्र के निवासियों को एक नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मियांपुर नामकरण की पूर्ववर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि “आप लोगों की पहचान छुपाने के लिए गांव का नाम मियांपुर किया गया था।” सीएम ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह विडंबना है कि एक ऐसी बस्ती जहाँ “एक भी मुसलमान नहीं है, वहां का नाम मियांपुर कर दिया गया।” यह टिप्पणी स्पष्ट करती है कि सरकार की नज़र में यह नामकरण एक तरह से पहचान छिपाने का प्रयास था, जिसे अब सुधारा जा रहा है ताकि निवासियों की मूल पहचान उजागर हो सके।

पहचान छिपाने के आरोप और टैगोर से जुड़ाव

मुख्यमंत्री ने आगे इस बस्ती के निवासियों के मूल और उनकी पहचान की बहाली पर बात की। उन्होंने दृढ़तापूर्वक कहा, “लेकिन अब इसका नाम मियांपुर नहीं रहेगा, बांग्लादेश से आए इन बंधुओं की बस्ती का नाम रविंद्र नगर होगा।” यह बयान इस बात की पुष्टि करता है कि यह बस्ती उन हिंदू परिवारों की है जो भारत-पाकिस्तान विभाजन के कठिन दौर में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान, जिसे अब बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है, से विस्थापित होकर यहां बसे थे। सरकार का यह कदम इन विस्थापित समुदायों को न केवल एक नया नाम बल्कि उनके इतिहास और संघर्ष को स्वीकार करते हुए एक सम्मानजनक पहचान प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

नए नाम ‘रविंद्र नगर’ का चयन भी गहन प्रतीकात्मक अर्थ लिए हुए है। सीएम योगी ने स्वयं बताया कि “इस देश को राष्ट्रगान देने वाले रविंद्र नाथ टैगोर के नाम पर अब आपकी पहचान होगी।” विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, संगीतकार और नोबेल पुरस्कार विजेता रविंद्रनाथ टैगोर ने न केवल भारत का राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ लिखा, बल्कि बांग्लादेश का राष्ट्रगान ‘आमार सोनार बांग्ला’ भी उन्हीं की रचना है। उनके नाम पर इस बस्ती का नामकरण करना बंगाली विरासत और संस्कृति के प्रति एक सम्मान है, जो इन विवासियों की सांस्कृतिक जड़ों से गहरा जुड़ाव रखता है। यह एक तरह से राष्ट्रगान के रचयिता को श्रद्धांजलि भी है।

जनकल्याणकारी योजनाओं का भी मिलेगा लाभ

मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में विभाजन के समय विस्थापित हुए इन हिंदू परिवारों के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने घोषणा की कि इन सभी परिवारों को ‘भौमिक अधिकार’ का दर्जा प्रदान किया गया है। भौमिक अधिकार का अर्थ है कि इन विस्थापितों को उनकी ज़मीन पर कानूनी मालिकाना हक मिलेगा, जिससे वे अपनी संपत्ति के वास्तविक स्वामी बन सकेंगे और भविष्य में किसी भी प्रकार की अनिश्चितता से बचेंगे। इसके साथ ही, सीएम ने यह भी सुनिश्चित किया कि इन परिवारों को सरकार द्वारा चलाई जा रहीं सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी मिलेगा, जिससे उनका सामाजिक और आर्थिक उत्थान हो सके। यह कदम उनके पुनर्वास और मुख्यधारा में एकीकरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

सीएम योगी ने अपने संबोधन के अंत में बंगाल की भूमि के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि “बंगाल की धरती भारत के आध्यात्म और विरासत की धरती है।” यह टिप्पणी केवल टैगोर जैसे महान व्यक्तित्वों को ही नहीं, बल्कि उस समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को भी दर्शाती है जिससे ये विस्थापित परिवार आते हैं। यह बयान यह भी स्पष्ट करता है कि सरकार इन समुदायों की सांस्कृतिक पहचान को स्वीकार करती है और उन्हें भारत की विशाल आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का एक अविभाज्य अंग मानती है। यह नाम परिवर्तन और समर्थन इन समुदायों को अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए एक सम्मानजनक भविष्य प्रदान करने का एक प्रयास है।

Ankita Chourdia
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