वृंदावन की पावन धरा पर एक बार फिर कृष्ण भक्ति का अनुपम दृश्य देखने को मिला है, जब बिहार के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने वंशीवट पर अपनी मधुर बांसुरी बजाकर और गोपियों के साथ नृत्य कर सभी को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। दरअसल यह मनमोहक क्षण स्वयं तेज प्रताप यादव द्वारा साझा किए गए एक वीडियो के माध्यम से सोशल मीडिया पर छा गया है, जिसमें वे वृंदावन की आध्यात्मिक आभा में पूरी तरह लीन दिखाई दे रहे हैं।
दरअसल पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव का कृष्ण भक्ति के प्रति गहरा अनुराग जगजाहिर है और वे अक्सर इसी कारण सुर्खियों में रहते हैं। वृंदावन नगरी के प्रति उनका विशेष लगाव किसी से छिपा नहीं है। वे अक्सर बंसी बजाते हुए अथवा गोपियों के संग नृत्य करते हुए सोशल मीडिया पर अपने भक्तिमय स्वरूप को प्रदर्शित करते रहे हैं। एक बार फिर, पूर्व मंत्री तेज प्रताप वृंदावन में दिखे हैं, जहाँ वे गोपियों के बीच बैठकर बांसुरी की मोहक धुन छेड़ रहे थे।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
वहीं यह भक्तिमय वीडियो, जिसमें तेज प्रताप मुरली बजा रहे हैं और उनके चारों ओर गोपियां भक्तिभाव से नृत्य कर रही हैं, तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर इस वीडियो को साझा करते हुए लिखा है, “वृंदावन के पावन धाम में स्थित वंशीवट वह दिव्य स्थान माना जाता है जहाँ भगवान श्रीकृष्ण अपनी मधुर बांसुरी बजाते थे। बांसुरी की मोहक धुन।” इस वीडियो के पृष्ठभूमि में ‘आओ पधारो दरश मैं करूं, नयन से नयन का मिलन मैं करूं…’ जैसे कृष्ण-गोपी प्रेम को दर्शाते भक्तिमय गीत बज रहे थे, जो समूचे माहौल को और भी दिव्य बना रहे थे।
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तेज प्रताप यादव का वृंदावन से अटूट संबंध
दरअसल तेज प्रताप यादव ने स्वयं कई बार यह व्यक्त किया है कि कॉलेज के दिनों से ही वृंदावन की हर गली-कूचे से उनका गहरा जुड़ाव रहा है। वे श्रीकृष्ण की लीला स्थली में जाकर स्वयं को उनकी भक्ति में तल्लीन पाते हैं और यह उनका वृंदावन से अटूट संबंध दर्शाता है। उनकी यह कृष्ण भक्ति केवल वृंदावन तक ही सीमित नहीं है। वे कई मौकों पर सियासी रैलियों और जनसंपर्क कार्यक्रमों के मंचों पर भी मुरली बजाते हुए देखे गए हैं, जिससे उनके प्रशंसकों को भी उनकी इस कला का दर्शन होता रहा है। विशेष रूप से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और होली जैसे पावन पर्वों पर उनकी बंसी वादन की कला देखते ही बनती है, जो उनकी धार्मिक पहचान का एक अभिन्न अंग बन चुकी है।
बांसुरी वादन के प्रति उनके इस अनुराग को मात्र एक शौक नहीं, बल्कि उनकी कलात्मक और धार्मिक पहचान के रूप में भी सराहा जाता है। कृष्ण स्वरूप में अपनी प्रस्तुति के अतिरिक्त, वे कभी बाबा भोलेनाथ के रूप में भी दर्शन देते रहे हैं, जिससे उनकी बहुमुखी धार्मिक आस्था का पता चलता है। शंखनाद से लेकर गिटार वादन तक, उन्होंने विभिन्न माध्यमों से सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है, जो उनकी अनूठी शैली का परिचायक है।






