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कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने पर अखिलेश यादव का बीजेपी पर निशाना, कहा – ‘ये भाजपाइयों की मुनाफ़ाखोरी’

Written by:Banshika Sharma
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देश में 1 अप्रैल 2026 से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत ₹2078.50 हो गई है, जिस पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला है। दरअसल उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार युद्ध के बहाने दाम बढ़ा रही है और इससे कालाबाजारी बढ़ रही है।
कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने पर अखिलेश यादव का बीजेपी पर निशाना, कहा – ‘ये भाजपाइयों की मुनाफ़ाखोरी’

देश में 1 अप्रैल 2026 से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में बड़ा इजाफा हुआ है। अब यह सिलेंडर ₹2078.50 पर पहुंच गया है, जिससे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के बजट पर सीधा असर पड़ रहा है। इस मूल्य वृद्धि को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार पर जमकर निशाना साधा है। यादव ने आरोप लगाया है कि सरकार युद्ध के बहाने लगातार कमर्शियल गैस के दाम बढ़ा रही है, जिससे देश में कालाबाजारी और मुनाफाखोरी को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने बीजेपी सरकार को ‘पूरी तरह फेल गवर्नमेंट’ करार दिया है।

दरअसल अखिलेश यादव ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट (एक्स) के जरिए सरकार की आर्थिक नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा है, “बीजेपी युद्ध के बहाने लगातार कमर्शियल गैस के दाम बढ़ाती जा रही है क्योंकि जिस अनुपात में दाम बढ़ते हैं, उससे अधिक अनुपात में कालाबाज़ारी बढ़ती है और भाजपाइयों की मुनाफ़ाखोरी भी।” सपा प्रमुख के इस बयान में आरोप की गंभीरता साफ झलकती है, जहां वे केवल कीमत वृद्धि को नहीं, बल्कि उसके पीछे के कथित मकसद और उसके परिणामों को भी जोड़ रहे हैं। उनका यह हमला इस ओर इशारा करता है कि विपक्ष आने वाले समय में महंगाई और अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सरकार को और भी aggressively घेरेगा।

मूल्य वृद्धि केवल कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों पर लागू हुई

वहीं इस बीच, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बुधवार को एक प्रेस बयान जारी कर कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे की वजह और उसके दायरे को स्पष्ट किया है। मंत्रालय ने साफ तौर पर कहा है कि यह मूल्य वृद्धि केवल कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों पर लागू हुई है। आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि घरेलू गैस सिलेंडरों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। साथ ही, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत मिलने वाले रियायती सिलेंडरों की कीमत भी अपरिवर्तित रखी गई है, ताकि गरीबों पर आर्थिक बोझ न पड़े।

मंत्रालय के बयान के अनुसार, 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत अभी भी 913 रुपए पर बनी हुई है। यह कीमत देश के अधिकांश हिस्सों में लागू है और इसमें किसी भी तरह का इजाफा नहीं किया गया है। इसी तरह, पीएमयूवाई योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को 613 रुपए में एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसकी सब्सिडी वाली कीमत भी स्थिर रखी गई है।

कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में लगातार हुई बढ़ोतरी

कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है। 1 फरवरी 2026 को एक कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 1740.50 रुपये थी। इसके बाद 1 मार्च 2026 को इसमें मामूली इजाफा हुआ और यह 1768.50 रुपये पर पहुंच गई। फिर 7 मार्च 2026 को एक बड़ी छलांग लगाते हुए इसकी कीमत 1883.00 रुपये हो गई। अब, 1 अप्रैल 2026 से लागू हुई नई दरों के बाद, यह सिलेंडर रिकॉर्ड 2078.50 रुपये में मिल रहा है। यह लगातार और तीव्र वृद्धि होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग सेवाओं और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए एक गंभीर चुनौती बन रही है, क्योंकि यह सीधे तौर पर उनके परिचालन लागत को बढ़ाती है, जिसका असर अंततः उपभोक्ताओं द्वारा चुकाई जाने वाली कीमतों पर पड़ता है।

सरकार ने कीमतों में बढ़ोतरी का बचाव करते हुए पब्लिक सेक्टर की तेल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) को हो रहे भारी नुकसान का हवाला दिया है। मंत्रालय ने अपने बयान में बताया है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कीमतों के हिसाब से, तेल मार्केटिंग कंपनियों को हर एक एलपीजी सिलेंडर पर औसतन 380 रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह नुकसान वित्तीय वर्ष के अंत तक, यानी मई 2026 के आखिर तक, लगभग 40,484 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है। सरकार का तर्क है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में अस्थिरता और बढ़ोतरी ही इस स्थिति का मुख्य कारण है, और कंपनियों को हुए घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाना पड़ा है।

मंत्रालय ने यह भी याद दिलाया है कि पिछले साल, यानी 2025 में भी ऐसी ही स्थिति बनी थी। उस समय तेल मार्केटिंग कंपनियों को कुल मिलाकर 60,000 करोड़ रुपए का भारी नुकसान हुआ था। उस नुकसान को कम करने के लिए, 30,000 करोड़ रुपए का भार तेल पीएसयू (सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां) ने खुद वहन किया था। बाकी बचे 30,000 करोड़ रुपए का बोझ भारत सरकार ने अपने ऊपर लिया था। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम भारतीय नागरिकों को एलपीजी की ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों के सीधे प्रभाव से बचाने और आम उपभोक्ता पर महंगाई का अत्यधिक बोझ न पड़े, इसके लिए उठाया गया था।

Banshika Sharma
लेखक के बारे में
मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma
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