धार्मिक नगरी उज्जैन एक बार फिर भक्ति, आस्था और संस्कृति के रंग में रंगने जा रही है। आज से शुरू हुई दो दिवसीय शिप्रा तीर्थ परिक्रमा और गंगा दशमी महोत्सव में हजारों श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। रामघाट से निकलने वाली यह परिक्रमा सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि जल संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता का बड़ा संदेश भी दे रही है।
इस बार आयोजन को खास बनाने के लिए कई बड़े कार्यक्रम रखे गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 26 मई को मां शिप्रा को 351 फीट लंबी चुनरी अर्पित करेंगे। वहीं पहली बार भारतीय नौसेना बैंड की प्रस्तुति और प्रसिद्ध गायिका मैथिली ठाकुर का भक्ति संगीत कार्यक्रम श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेगा।
रामघाट से शुरू हुई शिप्रा तीर्थ परिक्रमा
उज्जैन में शिप्रा तीर्थ परिक्रमा की शुरुआत रविवार सुबह रामघाट से हुई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधु-संत और स्थानीय लोग इस यात्रा में शामिल हुए। परिक्रमा के दौरान श्रद्धालु शिप्रा नदी के तट पर स्थित विभिन्न पौराणिक तीर्थों के दर्शन और पूजन करेंगे। पूरे मार्ग में भजन-कीर्तन और धार्मिक जयकारों से माहौल भक्तिमय बना हुआ है।
पिछले 22 वर्षों से यह परिक्रमा लगातार आयोजित की जा रही है। हर साल इसमें श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। इस बार भी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है।
गंगा दशमी पर मां शिप्रा को अर्पित होगी 351 फीट लंबी चुनरी
इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण 26 मई को होने वाला विशेष कार्यक्रम रहेगा। गंगा दशमी के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शाम 5 बजे मां शिप्रा को 351 फीट लंबी चुनरी अर्पित करेंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार गंगा दशमी के दिन नदी पूजन और दान का विशेष महत्व माना जाता है। इस दौरान घाटों पर विशेष पूजा-अर्चना होगी। बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिप्रा स्नान भी करेंगे। प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।
पहली बार भारतीय नौसेना बैंड देगा प्रस्तुति
इस बार का आयोजन कई मायनों में खास माना जा रहा है। पहली बार भारतीय नौसेना बैंड अपनी प्रस्तुति देगा। धार्मिक आयोजन में सेना के बैंड की प्रस्तुति लोगों के लिए नया अनुभव होगी। इसके अलावा प्रसिद्ध भजन गायिका मैथिली ठाकुर अपनी टीम के साथ भक्ति संगीत प्रस्तुत करेंगी। आयोजकों का कहना है कि भक्ति संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को भारतीय संस्कृति और परंपरा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
जल संरक्षण का भी दिया जाएगा संदेश
शिप्रा तीर्थ परिक्रमा अब सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं रह गई है। इसे जल संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता अभियान से भी जोड़ा गया है। “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को नदियों और जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। परिक्रमा में शामिल एक विशेष पर्यावरण दल रास्ते में बीजारोपण भी करेगा। लोगों को पेड़ लगाने और जल बचाने का संदेश दिया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए नदियों को बचाना बेहद जरूरी है। इसलिए धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जा रहा है।
शिप्रा नदी से जुड़े इतिहास पर भी होगा अध्ययन
इस बार परिक्रमा में एक विशेष पुरातत्व दल भी शामिल किया गया है। यह दल शिप्रा नदी से जुड़े ऐतिहासिक और पुरातात्विक पहलुओं का अध्ययन करेगा। उज्जैन का इतिहास हजारों साल पुराना माना जाता है और शिप्रा नदी का धार्मिक महत्व भी बेहद खास है। विशेषज्ञों का मानना है कि नदी किनारे कई ऐसे ऐतिहासिक स्थल और जानकारी मिल सकती है, जो उज्जैन की प्राचीन संस्कृति को समझने में मदद करेगी।
पूरे शहर में दिख रहा धार्मिक उत्साह
शिप्रा तीर्थ परिक्रमा को लेकर पूरे उज्जैन में उत्साह का माहौल है। घाटों और मंदिरों को आकर्षक रोशनी और सजावट से सजाया गया है। शहर में बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी है। होटल, धर्मशाला और आश्रमों में भी भीड़ दिखाई दे रही है।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि ऐसे आयोजनों से शहर के व्यापार और पर्यटन को भी फायदा मिलता है। पूजा सामग्री, फूल-माला और प्रसाद की दुकानों पर अच्छी भीड़ देखी जा रही है।
प्रशासन ने किए विशेष इंतजाम
हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने विशेष व्यवस्था की है। रामघाट और प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। मेडिकल टीम, पेयजल और सफाई व्यवस्था पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए कई मार्गों पर डायवर्सन प्लान भी लागू किया गया है।






