समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नोएडा में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चल रहे कर्मचारियों के आंदोलन को लेकर उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार को घेरा है। उन्होंने भाजपा सरकार पर पूंजीपतियों का पक्ष लेने और श्रमिकों-मजदूरों के शोषण की नीति अपनाने का आरोप लगाया।
सपा नेता ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार दोनों की है। उन्होंने कहा कि जब मजदूर अपनी मांगों को लेकर सामने आए तब सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अन्य राज्यों में श्रमिकों के वेतन में बढ़ोतरी की गई है तो उत्तर प्रदेश में मजदूरों को राहत क्यों नहीं दी गई।
क्या है मामला
बता दें कि नोएडा के फेज-2 स्थित औद्योगिक क्षेत्र, खासकर होजरी कॉम्प्लेक्स में काम करने वाले हजारों श्रमिक पिछले कई दिनों से वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। यह विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे तेज होता गया और सोमवार को बड़े पैमाने पर कर्मचारियों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले गया। प्रदर्शनकारियों ने कुछ वाहनों में आग लगा दी, पथराव किया और सड़क जाम कर दिया जिससे नोएडा-दिल्ली बॉर्डर सहित मुख्य मार्गों पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
ये हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
कर्मचारियों की मुख्य मांगों में न्यूनतम मासिक वेतन 18,000 से 20,000 रुपये तक बढ़ाने, हरियाणा सरकार की तरह 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी लागू करना, ओवरटाइम पर डबल भुगतान, समय पर वेतन, साप्ताहिक छुट्टी, ईपीएफ-ईएसआई, बोनस और यौन उत्पीड़न शिकायत समिति का गठन जैसी बातें शामिल हैं। इन्होंने वेतन में सालाना सिर्फ 250-350 रुपये बढ़ोत्तरी को अपना शोषण करार दिया है और कहा है कि बढ़ती महंगाई में इतने कम वेतन से परिवार का गुजारा करना असंभव हो गया है।
अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा
इस मुद्दे पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार पर पूंजीपतियों का पक्ष लेने और मजदूरों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है। एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा है कि भाजपा सरकार के दौर में अन्याय अपने चरम पर पहुंच गया है और यह कई रूपों में सामने आ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आर्थिक स्तर पर लोगों पर दबाव बढ़ रहा है, महंगाई लगातार बढ़ाई जा रही है और बेरोजगारी भी तेजी से फैल रही है। अखिलेश यादव ने कहा कि नोएडा में जो हालात बने हैं वे इसी असंतोष का नतीजा हैं, जहां बड़ी संख्या में मजदूर अपनी जायज मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए और उनके आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया।






