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संभल हिंसा केस: सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क को हाईकोर्ट से राहत, मुकदमे की अग्रिम कार्रवाई पर रोक

Written by:Saurabh Singh
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मामला 24 नवंबर 2024 का है, जब संभल की जामा मस्जिद में सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई थी। आगजनी, गोलीबारी और बवाल में चार युवकों की मौत हो गई थी।
संभल हिंसा केस: सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क को हाईकोर्ट से राहत, मुकदमे की अग्रिम कार्रवाई पर रोक

संभल हिंसा मामले में समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उनके खिलाफ चल रही मुकदमे की अग्रिम कार्रवाई पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति समीर जैन ने सांसद बर्क की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इमरान उल्लाह, अधिवक्ता विनीत विक्रम और इकबाल अहमद तथा सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल को सुनने के बाद दिया।

क्या है मामला?

मामला 24 नवंबर 2024 का है, जब संभल की जामा मस्जिद में सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई थी। आगजनी, गोलीबारी और बवाल में चार युवकों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद एसआई दीपक राठी ने कोतवाली थाने में सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क, सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल समेत सैकड़ों लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। एफआईआर में बर्क पर दंगा भड़काने सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए थे।

अग्रिम कार्रवाई पर रोक

सांसद बर्क ने याचिका में 12 जून को दाखिल चार्जशीट और 18 जून को संभल के स्पेशल जज (एमपी/एमएलए) के संज्ञान आदेश सहित पूरी कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी। उन्होंने यह भी अपील की थी कि याचिका पर सुनवाई पूरी होने तक उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अग्रिम कार्रवाई पर रोक लगा दी और सरकार को नोटिस जारी किया।

जफर अली को पहले दे दी गई थी जमानत

इसी मामले में 24 जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शाही जामा मस्जिद के सदर जफर अली को सशर्त जमानत दी थी। जफर अली को विवेचना के दौरान नाम सामने आने के बाद गिरफ्तार किया गया था। हालांकि एफआईआर में उनका नाम शामिल नहीं था।