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अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने परिवार के साथ, सीएम योगी से की मुलाकात, छात्रों को दी चुनौतियों का सामना करने की सलाह

Written by:Saurabh Singh
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अंतरिक्ष मिशन में सात भारतीय और चार वैश्विक प्रयोग किए गए, जो वैज्ञानिक खोजों को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण थे। उन्होंने अंतरिक्ष में अप्रत्याशित खतरों जैसे फायर अलार्म, तैरती वस्तुओं और जमीनी चेतावनियों का जिक्र किया।
अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने परिवार के साथ, सीएम योगी से की मुलाकात, छात्रों को दी चुनौतियों का सामना करने की सलाह

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से लौटे पहले भारतीय ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने आज लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। इस दौरान उनके परिवार के सदस्य भी मौजूद रहे। इससे पहले, शुभांशु ने सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (सीएमएस) गोमती नगर विस्तार शाखा में आयोजित अभिनंदन समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि चुनौतियों से घबराने के बजाय उनका डटकर सामना करने से सफलता निश्चित मिलती है। उन्होंने युवाओं को मेहनत, अनुशासन और धैर्य के साथ अपने लक्ष्यों को हासिल करने की प्रेरणा दी।

सीएमएस के समारोह में शुभांशु ने अंतरिक्ष यात्रा के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि शून्य गुरुत्वाकर्षण में रहना एक अनूठी चुनौती है, जहां शरीर को नए वातावरण में ढलने के लिए काफी समायोजन करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि माइक्रोग्रैविटी न केवल अंतरिक्ष विज्ञान, बल्कि चिकित्सा, सामग्री अनुसंधान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी नए अवसर खोलती है। शुभांशु ने 2040 में चंद्रमा मिशन की चर्चा करते हुए छात्रों से आह्वान किया कि वे ऐसी तैयारी करें कि भविष्य में इस मिशन का हिस्सा बन सकें।

अंतरिक्ष मिशन में सात भारतीय और चार वैश्विक प्रयोग

शुभांशु ने बताया कि अंतरिक्ष मिशन में सात भारतीय और चार वैश्विक प्रयोग किए गए, जो वैज्ञानिक खोजों को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण थे। उन्होंने अंतरिक्ष में अप्रत्याशित खतरों जैसे फायर अलार्म, तैरती वस्तुओं और जमीनी चेतावनियों का जिक्र किया। धरती पर लौटने के अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि वापसी पर सब कुछ भारी लगता है, और दिमाग मेहनत को भूल जाता है। शुभांशु ने भारत के 2047 के विकसित भारत के सपने को रेखांकित करते हुए कहा कि अंतरिक्ष मिशन का हर पहलू तकनीकी विकास, युवा प्रेरणा और वैज्ञानिक अनुसंधान इस लक्ष्य को हासिल करने में योगदान दे सकता है।

आस्था उनकी टीम में है, जिसके बिना यह मिशन संभव नहीं

मीडिया से बातचीत में शुभांशु ने लखनऊ में मिले अपार समर्थन पर आश्चर्य और कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उनकी आस्था उनकी टीम में है, जिसके बिना यह मिशन संभव नहीं था। लखनऊ में मिले स्वागत ने उन्हें भविष्य के कार्यों के लिए नया साहस दिया। उन्होंने छात्रों को संदेश दिया कि वे भारत की अनूठी ताकत हैं और वैश्विक अंतरिक्ष अभियानों में योगदान दे सकते हैं। शुभांशु की यह यात्रा और उनके प्रेरक शब्द न केवल लखनऊ, बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन गए हैं।