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प्राण-प्रतिष्ठा के दो वर्ष पूरे होने पर अयोध्या को दिव्य उपहार, राम मंदिर को मिला 286 किलो का भव्य कोदंड

Written by:Bhawna Choubey
Published:
अयोध्या में राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को दो वर्ष पूरे होने के पावन अवसर पर एक ऐतिहासिक भेंट अर्पित की गई। पंचधातु से निर्मित 286 किलो वजनी स्वर्ण कोदंड देशभर की श्रद्धा, शौर्य और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बनकर सामने आया है।
प्राण-प्रतिष्ठा के दो वर्ष पूरे होने पर अयोध्या को दिव्य उपहार, राम मंदिर को मिला 286 किलो का भव्य कोदंड

केवल आस्था का केंद्र बना है, बल्कि देशभर के श्रद्धालुओं की भावनाओं और विश्वास का भी प्रतीक बन चुका है। प्राण प्रतिष्ठा के बाद से लगातार रामलला को अनमोल भेंटें अर्पित की जा रही हैं, जो भारत की सांस्कृतिक चेतना और सामूहिक श्रद्धा को दर्शाती हैं।

इसी क्रम में प्राण प्रतिष्ठा के तीसरे वर्ष की शुरुआत पर रामलला को एक ऐसी भव्य और ऐतिहासिक भेंट दी गई है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यह भेंट है 286 किलोग्राम वजनी पंचधातु से निर्मित ‘स्वर्ण कोदंड’, जिसे विधिवत राम मंदिर ट्रस्ट को सौंपा गया।

प्राण प्रतिष्ठा की वर्षगांठ पर ऐतिहासिक भेंट

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ पर यह स्वर्ण कोदंड अयोध्या लाया गया। पहले इसे कारसेवक पुरम में रखा गया, जहां श्रद्धालुओं ने इसके दर्शन किए। इसके बाद इसे राम मंदिर ट्रस्ट को सौंप दिया गया। यह क्षण भावनात्मक और ऐतिहासिक दोनों दृष्टि से विशेष माना जा रहा है।

प्राण प्रतिष्ठा के बाद से राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना का केंद्र बन गया है। ऐसे में इस तरह की भेंटें यह दर्शाती हैं कि रामलला के प्रति श्रद्धा केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि कला, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति से भी जुड़ी हुई है।

ओडिशा से अयोध्या तक आस्था की भव्य यात्रा

इस स्वर्ण कोदंड की यात्रा भी अपने आप में ऐतिहासिक रही। ओडिशा के राउरकेला से 3 जनवरी 2026 को इसकी भव्य शोभायात्रा शुरू हुई। यह यात्रा सनातन जागरण मंच के तत्वावधान में आयोजित की गई थी। शोभायात्रा ओडिशा के सभी 30 जिलों से होकर गुजरी, जहां श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा और पूजन के साथ इसका स्वागत किया।

19 जनवरी को यह शोभायात्रा पुरी पहुंची, जहां भगवान जगन्नाथ के दर्शन-पूजन के बाद आगे की यात्रा शुरू हुई। 22 जनवरी को, जो स्वयं प्राण प्रतिष्ठा की तिथि है, उसी पावन संयोग पर यह स्वर्ण कोदंड अयोध्या पहुंचा और रामलला को समर्पित किया गया। यह यात्रा देश की सांस्कृतिक एकता और सनातन परंपरा की जीवंत मिसाल बन गई।

पंचधातु से निर्मित, आठ महीने की साधना का परिणाम

286 किलोग्राम वजनी यह स्वर्ण कोदंड पंचधातु से तैयार किया गया है। इसमें सोना, चांदी, तांबा, जस्ता और लोहे का प्रयोग हुआ है। इसे तमिलनाडु के कांचीपुरम की 48 महिला कारीगरों ने तैयार किया है। इन कारीगरों ने करीब आठ महीने तक लगातार मेहनत कर इस कोदंड को आकार दिया।

सवा करोड़ की लागत

इस स्वर्ण कोदंड की अनुमानित लागत करीब सवा करोड़ रुपये बताई जा रही है। हालांकि, इसके पीछे छिपी भावना और आस्था का मूल्य किसी भी आर्थिक आंकड़े से कहीं अधिक है। श्रद्धालुओं और आयोजकों का कहना है कि यह भेंट भगवान श्रीराम के प्रति समर्पण और कृतज्ञता का भाव है। राम मंदिर में अर्पित की जा रही ऐसी भेंटें आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक धरोहर बनेंगी। ये भेंटें यह भी बताती हैं कि आधुनिक भारत अपनी जड़ों और परंपराओं से कितना गहराई से जुड़ा हुआ है।